अब केंद्रीय विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को केंद्र सरकार के विरोध में बयानबाजी करने या उसके खिलाफ होने वाले किसी प्रदर्शन में भाग लेने से पहले दस बार सोचना होगा। इन सभी पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर केंद्रीय सिविल सेवा नियमावली लागू होगी, जिसका उल्लंघन करने वाले को निलंबित या बर्खास्त करने का अधिकार केंद्र सरकार को मिल जाएगा। यह नियमावली केंद्र सरकार से अनुदान लेने वाले सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू की जाएगी।
इस नियमावली के लागू होने पर काम नहीं करने वाले शिक्षकों-कर्मचारियों को समय से पहले सेवानिवृत्ति देने का अधिकार भी केंद्र के पास होगा। ये नियमावली जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में लागू भी कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, इस नियमावली के दायरे में देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय और आईआईएम समेत अन्य केंद्रीय शिक्षण संस्थान आएंगे, जिनके पास अभी तक अपनी कोई नियमावली नहीं है।