शहरी कचरे के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए सरकार ने नया कदम उठाया है। स्थानीय शहरी निकायों को कचरे से निर्मित खाद की बिक्री पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय वित्तीय मदद देगा। मंत्रालय के मुताबिक निकायों को प्रति टन खाद बिक्री पर 1500 रुपये की वित्तीय मदद दी जाएगी। वहीं, नए खाद प्लांट लगाने के लिए राज्यों को 35 फीसदी फंड भी मंत्रालय से दिया जाएगा। शहरी निकाय किसानों को प्रत्यक्ष तौर पर खाद बिक्री कर वित्तीय मदद हासिल कर सकते हैं।
शहरी खाद को प्रोत्साहित करने की नीति में संशोधन कर केंद्रीय रसायन एवं खाद्य मंत्रालय ने शनिवार को शहरी विकास मंत्रालय के साथ मिलकर यह गाइडलाइन जारी की है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रवीण प्रकाश ने कहा कि इस कदम से कम कीमत पर किसानों को आसानी से खाद मिल सकेगा। वहीं शहरी कचरे से बने खाद की बिक्री भी बढ़ सकेगी।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरों को ठोस कचरे का प्रबंधन करने के लिए मदद करना है। इससे कचरा प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। वहीं कंपोस्ट प्लांट के लिए राज्यों को 35 फीसदी मदद केंद्र देगा। इस के तहत राज्य शहरों में नए कंपोस्ट प्लांट स्थापित कर सकते हैं या फिर बंद पड़े या पुराने कंपोस्ट प्लांट को ठीक करने व क्षमता बढ़ाने के लिए भी केंद्र से सहायता हासिल कर सकते हैं। मौजूदा समय में शहरी खाद का सालाना उत्पादन करीब 3.30 लाख टन होता है। मार्च 2018 तक सालाना शहरी खाद उत्पादन का लक्ष्य 46.7 लाख टन रखा गया है।