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The Cantonment Conspiracy: 'कठिन सच और आसान झूठ के बीच अक्सर थोड़े-बहुत टकराव', अपनी किताब पर बोले नरवणे

Sat, 21 Mar 2026 09:38 PM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे

सार

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे अब अपनी नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने साफ कहा है कि उनका भविष्य का लक्ष्य एक 'साधारण लेकिन अच्छा कहानीकार' बनना है। एक कार्यक्रम के दौरान, जो उनकी पहली किताब 'द कैंटोनमेंट कॉन्स्पिरेसी' से जुड़ा था, उन्होंने यह बात कही। उन्होंने बताया कि एक सैनिक से लेखक बनने का सफर उनके लिए काफी दिलचस्प रहा और उन्होंने इस प्रक्रिया को बहुत आनंद लिया।
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जनरल एमएम नरवणे, पूर्व सेना प्रमुख - फोटो : ANI
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अपनी पुस्तक 'द कैंटोनमेंट कॉन्स्पिरेसी' पर भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (सेवानिवृत्त) ने कहा कि, 'यह विशेष विषय हमेशा मेरे मन में था। कठोर सही और आसान गलत के बीच हमेशा थोड़ा-बहुत टकराव रहता है। यही वह पहलू है जिसे मैंने इस आधुनिकतावादी रचना के माध्यम से उजागर किया है।' जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि यह उनकी पहली किताब है और उन्हें लिखने का ज्यादा अनुभव नहीं था, फिर भी लोगों ने इसे अच्छा रिस्पॉन्स दिया है। उनके अनुसार, जो लोग पढ़ने के शौकीन हैं, उन्हें यह किताब जरूर पसंद आएगी।
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#WATCH | Pune | On his book, 'The Cantonment Conspiracy', Former Indian Army Chief General Manoj Mukund Naravane (Retd) says, "I always had this particular theme in mind. There's always a little bit of clash between the harder right and the easier wrong. That is one aspect which… pic.twitter.com/4QwAndT3eW

— ANI (@ANI) March 21, 2026

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क्या है किताब की कहानी और कौन हैं किरदार? 
यह किताब मार्च 2024 में प्रकाशित हुई थी और इसमें दो मुख्य किरदार- रोहित वर्मा और रेनुका खत्री- की कहानी है। दोनों नेशनल डिफेंस अकादमी से नए-नए निकले लेफ्टिनेंट होते हैं और एक हमले के केस में गवाह की हत्या के रहस्य को सुलझाने की कोशिश करते हैं। जनरल नरवणे ने आगे कहा कि अगर इसी तरह लोगों का प्यार मिलता रहा, तो वह इस कहानी को एक सीरीज के रूप में आगे बढ़ाना चाहते हैं। यानी आने वाले समय में रोहित और रेणुका पर आधारित और भी मिस्ट्री किताबें देखने को मिल सकती हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि लिखना उनके लिए नया नहीं है। सेना में रहते हुए उन्होंने कई सैन्य रिपोर्ट्स और आर्मी के अकादमिक जर्नल्स के लिए लेख लिखे हैं। इसके अलावा उन्होंने कुछ शॉर्ट स्टोरी भी लिखी थीं, जिनमें एक कहानी कारगिल युद्ध पर आधारित थी। हालांकि, उनकी एक और किताब (मेमॉयर) इस साल फरवरी में राजनीतिक विवाद का कारण भी बनी थी। 
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आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' पर विवाद
संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ था। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हो रही चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कुछ कागजों के जरिए 2020 के गलवां संघर्ष का जिक्र करते हुए अपना भाषण शुरू किया। इस दौरान सत्ता पक्ष ने उनके भाषण पर आपत्ति जताई थी। असल में राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि वे पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब के कुछ अंशों के जरिए चीन से संघर्ष के बारे में बताना चाहते थे। हालांकि, इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जो किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है, राहुल गांधी उसका जिक्र सदन में कैसे कर सकते हैं? वे इसके सत्यापन के लिए क्या सबूत देंगे?

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