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श्रद्धा से नहीं सरकारी कायदों से नियंत्रित होती हैं धार्मिक यात्राएं

Mon, 16 Jul 2018 12:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Pilgrims
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हर साल 2 जून से 2 अगस्त के बीच अमरनाथ यात्रा के लिए हजारों भक्त जाते हैं। अमरनाथ की गुफा श्रीनगर से लगभग 145 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान समुद्र तल से 3,078 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। गुफा 150 फीट ऊंची और 90 फीट लंबी है। हर साल इस यात्रा को शांतिपूर्ण तरीके से करवाना और आतंक से बचाकर रखना भारत सरकार की बड़ी चुनौती होती है। इस साल यात्रा के दौरान कुछ श्रद्धालुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी और कुछ समय के लिए यात्रा को बंद करना पड़ा था। श्रद्धालुओं के साथ सेना के जवान दिखाई देते हैं। क्या आपको पता है कि किस तरह से सरकार धार्मिक यात्राओं को नियंत्रित करती है। यदि नहीं तो आज हम आपको बताते हैं।

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क्यों सरकार अमरनाथ यात्रा को नियंत्रित करती है

साल 2000 से पहले यात्राओं में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता था। साल 1996 में हुई एक घटना में लगभग 250 तीर्थ यात्रियों की मौत हो गई थी। जिसके बाद नीतीश सेनगुप्ता की एक समिति बनाई गई जिसे कि इन मौतों की वजह की जांच करने थी। इसके बाद निर्णय लिया गया कि सरकार हस्तक्षेप करेगी। जम्मू और कश्मीर श्री अमरनाथ जी यात्रा श्राइन अधिनियम 2000 संसद से पास हो गया। यह अधिनियम यात्रा का प्रबंधन करने के लिए एक बोर्ड को बनाने की इजाजत देता था। अधिनियम के अनुसार 10 सदस्यों वाले बोर्ड का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल करेंगे यदि वह हिंदू हैं तो। गैर-हिंदू राज्यपाल राज्य से किसी प्रतिष्ठित हिंदू को नियुक्त करेगा जो बोर्ड का नेतृत्व करेगा। इसमें सरकारी अधिकारी भी सदस्य होते हैं।

किस तरह हज यात्रा होती है नियंत्रित

हज यात्रा कोटा के आधार पर होती है। सऊदी अधिकारी आमतौर पर सालाना हर देश से 1000 मुस्लिमों को यात्रा की इजाजत देते हैं। जिसके परिणामस्वरूप इंडोनेशिया, पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश को हज यात्रियों की संख्या में बहुमत मिलता है। भारत की हज समिति राज्य की मुस्लिम आबादी के अनुसार कोटा निर्धारित करती है। पिछले साल तक हज को केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी मिलती थी। जिसमें भारतीय फ्लाइटों में छूट और दूसरी तरह की सुविधाएं शामिल थीं। हालांकि इस साल से सब्सिडी नहीं दी जाएगी।
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कैलाश मानसरोवर यात्रा कैसे होती है आयोजित

इस यात्रा के लिए 60 श्रद्धालुओं के 18 बैच बनाए जाते हैं जो लिपुलेख पास रुट (उत्तराखंड और तिब्बत की सीमा) से यात्रा करते हैं। 50 श्रद्धालुओं वाले 10 बैच नाथू ला रुट (सिक्किम और तिब्बत की सीमा) से यात्रा करते हैं। श्रद्धालुओं के नामों की सूची कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ के द्वारा तैयार की जाती है। भारत सरकार हर बैच के साथ एक संपर्क अधिकारी की नियुक्ति करती है जो भारतीय और चीनी अधिकारियों के साथ समन्वय करते हैं। इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस यात्रियों को सुरक्षा और मेडिकल सुविधा प्रदान करती है।

क्या केंद्र सरकार कैलाश मानसरोवर और अमरनाथ यात्रा को सब्सिडी देती है?

संसद में पूछे गए सवाल के अनुसार केंद्र सरकार प्रत्यक्ष तौर पर कैलाश मानसरोवर और अमरनाथ श्रद्लुओं को सब्सिडी नहीं देती है। लेकिन विदेश मंत्रालय अपनी इच्छानुसार कैलाश मानसरोवर के यात्रियों को परिवहन, रहने की सुविधा, खाना, मेडिकल परीक्षण, गाइड आदि मुहैया करवाती है। कुछ राज्य सरकारें भी कैलाश मानसरोवर की यात्रा को सब्सिडी प्रदान करते हैं। 

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