आज राज्यसभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि जून 2014 में इराक से आतंकी संगठन आईएसआईएस द्वारा अगवा किए गए 39 भारतीय नागरिक मारे जा चुके हैं। मंत्री ने कहा कि वह परिवार को ठोस सबूत मिलने के बाद इस बात की जानकारी देना चाहती थीं। सरकार का कहना है कि उन्हें सोमवार को डीएनए रिपोर्ट मिली है जिससे यह पुष्टि हुई है कि लापता हुए सभी नागरिकों की बॉडी सामूहिक कब्र के नीचे मिली है। डेड बॉडी मोसुल और बादुश के पास से आईएसआईएस से मुक्ति मिलने के बाद मिली हैं।
स्वराज द्वारा यह घोषणा किए जाने के बाद कुछ पल के लिए राज्यसभा में खामोशी छा गई थी। उन्होंने बताया कि हमने सामूहिक कब्र में डेड बॉडीज को देखने के लिए गहराई तक जाने वाली सैटेलाइट का प्रयोग किया। हमने विनती की है कि इन बॉडीज को कब्र से निकलकार देश लाया जा सके। सुषमा ने बताया कि इस बात के सबूत हासिल करना आसान नहीं था। वहां बहुत सारी सामूहिक कब्रे हैं। हमने अपने लोगों की डेड बॉडीज को पहचानने के लिए बगदाद में डीएनए टेस्ट करवाए।
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने सरकार को अपना पुराना वादा याद दिलाया। जिसमें उसने आश्वासन दिया था कि सभी भारतीय जिंदा हैं। मारे गए भारतीयों में ज्यादातर पंजाब, बिहार, हिमाचल प्रदेश और बंगाल के मजदूर थे। मजदूर जब मोसुल से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे तभी आंतकी संगठने ने उन्हें पकड़ लिया था। आईएसआईएस के कब्जे से बचकर आए इकलौते हरजीत सिंह मसीह ने साल 2014 में ही दावा किया था कि 39 भारतीय मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है।