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सड़क हादसे में गंवाया पैर, अब मिलेंगे 96 लाख: चार साल बाद मिला इंसाफ, बीमा कंपनी को देना होगा मुआवजा

Wed, 21 Oct 2026 04:21 PM IST
नितिन गौतम पीटीआई, मुंबई

सार

ठाणे में एक ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को दुर्घटना में पैर गंवाने वाले व्यक्ति को 96 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने पीड़ित को मुआवजे की रकम पर ब्याज देने का भी आदेश दिया है। आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला
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ट्रिब्यूनल का फैसला। - फोटो : एआई
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विस्तार
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महाराष्ट्र के ठाणे में सड़क हादसे में अपना एक पैर गंवाने वाले 41 वर्षीय व्यक्ति को मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने 96.54 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। चार साल पहले एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी थी। हादसे में वह इतनी बुरी तरह घायल हुए थे कि डॉक्टरों को उनका बायां पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा था। ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को दिए अपने फैसले में ट्रक की बीमा कंपनी को पहले मुआवजे की रकम पीड़ित को देने और बाद में इसे वाहन मालिक से वसूलने का निर्देश दिया।
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तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक को मारी थी टक्कर
ट्रिब्यूनल के आदेश के मुताबिक, यह हादसा 18 अक्तूबर 2022 को ठाणे-बेलापुर रोड पर हुआ था। पीड़ित सुनील अर्जुन थोराट उस समय एक कंपनी में कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव के पद पर काम करते थे और उनकी मासिक सैलरी 56,533 रुपये थी। हादसे वाले दिन थोराट अपनी मोटरसाइकिल से जा रहे थे। इसी दौरान एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। चोटें इतनी गंभीर थीं कि डॉक्टरों को उनका बायां पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा।

ट्रक चालक के खिलाफ दर्ज हुई थी एफआईआर
हादसे के बाद पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद भारतीय दंड संहिता (IPC) और मोटर वाहन अधिनियम के तहत आरोपपत्र भी दाखिल किया था। हादसे में शामिल ट्रक मेसर्स नवदीप कंस्ट्रक्शन कंपनी का था। 
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बीमा कंपनी ने पीड़ित पर भी लगाया लापरवाही का आरोप
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने मुआवजे के दावे का विरोध किया। कंपनी ने दलील दी कि हादसे में पीड़ित की भी लापरवाही थी। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल के सदस्य आरवी मोहिते ने कहा कि ट्रक चालक और वाहन मालिक, दोनों में से किसी ने भी पुलिस की ओर से की गई कानूनी कार्रवाई को चुनौती नहीं दी थी। इसके अलावा बीमा कंपनी भी ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि हादसे में पीड़ित की लापरवाही थी या ट्रक इस दुर्घटना में शामिल नहीं था।

ट्रक का परमिट नहीं होने पर बीमा कंपनी को वसूली का अधिकार
ट्रिब्यूनल ने पाया कि हादसे के समय ट्रक के पास वैध फिटनेस सर्टिफिकेट था और चालक के पास भी वैध ड्राइविंग लाइसेंस मौजूद था। हालांकि, दुर्घटना की तारीख पर ट्रक का जरूरी परमिट नहीं था। ट्रिब्यूनल ने इसे बीमा पॉलिसी की शर्तों का तकनीकी उल्लंघन माना। इसी आधार पर बीमा कंपनी को मुआवजे की रकम ट्रक मालिक से बाद में वसूलने का अधिकार दिया गया।

96.54 लाख रुपये के साथ नौ फीसदी ब्याज भी मिलेगा
ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के आधार पर पीड़ित को लगी गंभीर चोटों और हादसे के कारण उनकी कमाई करने की क्षमता पर पड़े असर को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की रकम तय की। ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह सुनील थोराट को 96,54,895 रुपये का मुआवजा दे। इसके अलावा मुआवजे के दावे की अर्जी दाखिल किए जाने की तारीख से नौ फीसदी की दर से ब्याज भी देना होगा। ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि बीमा कंपनी को पहले पीड़ित को पूरी रकम का भुगतान करना होगा। इसके बाद वह कानून के मुताबिक ट्रक मालिक से इस रकम की वसूली कर सकती है।
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