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Court: 'पीड़िता खुद चाहती थी शादी में बदले रिश्ता', दुष्कर्म मामले में युवक को अदालत ने किया बरी

Sun, 16 Nov 2025 02:35 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे

सार

पीड़िता ने बाद में अपने बयान में दावा किया कि वे एक-दूसरे से प्यार करने लगे थे। अदालत ने कहा कि मामले की पूरी सुनवाई के दौरान पीड़िता की जन्म तिथि को साबित करने के लिए मूल जन्म प्रमाण पत्र पेश नहीं किया गया।
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यौन उत्पीड़न मामले में कोर्ट ने आरोपी को किया बरी - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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महाराष्ट्र में ठाणे की अदालत ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी एक शख्स को मुकदमे से बरी कर दिया। अदालत की ओर से मामले में नाबालिग लड़की की सही उम्र तय करने के लिए पर्याप्त सबूत न होने और दोनों के बीच रिश्ते को कमोबेश सहमति से बना हुआ दिखने का हवाला देते हुए ये आदेश सुनाया गया।  

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पॉक्सो मामलों की विशेष जज रूबी यू. मालवंकर ने 13 नवंबर को दिए गए अपने फैसले में कहा कि 22 वर्षीय युवक के खिलाफ अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा। आरोपी और पीड़िता महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भयंदर इलाके में ही रहते थे। पीड़िता की मां की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी के बाद युवक को 19 मई, 2020 को गिरफ्तार किया गया था। 

एफआईआर में युवक पर यौन उत्पीड़न, गाली-गलौज और धमकियां देने के आरोप लगाए गए थे। युवक पर भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए थे। हालांकि, 20 अगस्त, 2020 को आरोपी युवक को जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
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पीड़िता ने बाद में अपने बयान में दावा किया कि वे एक-दूसरे से प्यार करने लगे थे और उनके बीच गहरा रिश्ता था। अदालत ने पॉक्सो अधिनियम के मामले में उम्र के जरूरी महत्व पर ध्यान दिया।

पॉक्सो एक्ट की धारा 2 (घ) के मुताबिक नाबालिग की उम्र 18 साल से कम होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि पीड़िता 18 साल से कम की है, ये साबित करना अभियोजन पक्ष का काम है। पीड़िता की जन्म तिथि 24 जून, 2003 बताई गई थी और उसकी मां ने जन्म प्रमाण पत्र की फोटोकॉपी जमा करने का दावा किया था।

अदालत ने कहा कि मामले की पूरी सुनवाई के दौरान पीड़िता की जन्म तिथि को साबित करने के लिए मूल जन्म प्रमाण पत्र पेश नहीं किया गया। नतीजतन पीड़िता की सही जन्म तिथि को साबित करने वाला कोई भी सबूत रिकॉर्ड पर नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे सबूतों के अभाव में अभियोजन पक्ष ये साबित करने में नाकाम रहा कि जब घटना घटी, उस दौरान पीड़िता की उम्र 18 साल से कम थी। जज ने पीड़िता के बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पीड़िता ने खुद माना है कि आरोपी के साथ उसके रिश्ते अपनी मर्जी से और सहमति से बने थे। 

अदालत ने कहा कि पीड़िता ने ये भी कहा है कि अगर उसकी मां पुलिस स्टेशन नहीं जाती तो वह खुद पुलिस के पास कभी नहीं जाती। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता आरोपी से शादी करना चाहती थी। वो चाहती थी कि ये प्रेम संबंध शादी में बदले और इसके लिए दोनों ओर से रिश्तेदार एक-दूसरे से मिले भी थे।

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