केरल के हिंदुत्व विचारक टीजी मोहनदास की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सोमवार को उनका एक वीडियो सामने आने के बाद उनकी आलोचना शुरू हो गई। इस वीडियो में कथित तौर पर उन्होंने कहा था कि अगर उनके हाथ में सत्ता होती तो वह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को गोली मार देते।
मोहनदास भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्य बौद्धिक प्रकोष्ठ के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। उन्होंने रविवार को अपने यूट्यूब चैनल 'पत्रिका' पर जारी एक वीडियो में कथित तौर पर यह बयान दिया था।
प्रदर्शन से निपटने पर क्या बोले मोहनदास?
30 मिनट के इस वीडियो में मोहनदास ने नीट परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ छात्र संगठनों और विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके पर विस्तार से बात की।
उन्होंने कहा, मैं जंतर-मंतर के आसपास करीब 4 वर्ग किलोमीटर के इलाके में कर्फ्यू लगा दूंगा। इसके बाद भीड़ को हटने के लिए तीन बार चेतावनी दूंगा। उसके बाद मैं गोली चलाऊंगा। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग जाएंगे। कुछ लोग मर सकते हैं और कुछ लोग दिव्यांग हो सकते हैं। चार घंटे के अंदर स्थिति शांत हो जाएगी। फिर मैं शवों को इकट्ठा करके अस्पताल ले जाऊंगा।
महिलाओं पर भी दिया विवादित बयान
एक अन्य वीडियो में मोहनदास ने कथित तौर पर कहा कि प्रदर्शन में शामिल होने वाली धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) महिलाएं 'सामूहिक दुष्कर्म का आनंद लेती हैं।'
उन्होंने कहा, सामूहिक दुष्कर्म होंगे। इस मामले में कोई शिकायत नहीं होगी, क्योंकि ये वे लोग हैं जिन्हें दुष्कर्म पसंद है। ऐसी महिलाएं हैं जिन्हें दुष्कर्म पसंद है, खासकर वामपंथी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और मजदूर वर्ग से जुड़ी महिलाएं। अब अगर इस दौरान किसी की मौत हो जाती है, तो वे उस व्यक्ति को शहीद बना देंगे।
विपक्ष ने क्या प्रतिक्रिया दी?
राज्यसभा सांसद और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष एए रहीम ने द हिंदू से कहा कि मोहनदास के बयानों का राजनीतिक और कानूनी तरीके से जवाब दिया जाएगा।
रहीम ने कहा, यह बयान भाजपा को उजागर करता है, क्योंकि भाजपा के नेता मोहनदास से वे बातें कहलवा रहे हैं, जिन पर वे विश्वास करते हैं। लेकिन केरल जैसे समाज में खुले तौर पर नहीं कह सकते। उन्होंने कहा कि ऐसी बातें समाज में विभाजन फैलाने के स्पष्ट उद्देश्य से कही जा रही हैं।
रहीम ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी इस तरह के नफरत फैलाने वाले भाषणों के खिलाफ स्पष्ट चेतावनी दी है। मैंने यह वीडियो पहले ही वकीलों को भेज दिया है, ताकि जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा सके।
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सोशल मीडिया पर भी हुई आलोचना
मोहनदास के वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, उनके यूट्यूब चैनल पर कुछ लोग उनके समर्थन में टिप्पणियां करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं।
आरएसएस ने क्या कहा?
वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने दक्षिणपंथी राजनीतिक टिप्पणीकार मोहनदास के नई दिल्ली में हालिया छात्र आंदोलन को लेकर दिए गए विवादित बयानों की निंदा की। आरएसएस ने कहा कि ये उनके 'निजी विचार' हैं और इनकी निंदा की जानी चाहिए।
आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी केबी श्रीकुमार ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि मोहनदास किसी भी स्तर पर आरएसएस के पदाधिकारी नहीं हैं। श्रीकुमार ने कहा, हालिया प्रदर्शन को लेकर टीजी मोहनदास की टिप्पणियां उनके निजी विचार हैं। वह किसी भी स्तर पर आरएसएस के अधिकारी नहीं हैं। आरएसएस उनके विचारों से सहमत नहीं है और उनकी हरसंभव सख्त तरीके से निंदा की जानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री विजयन ने भी निंदा की
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी मोहनदास के बयानों की निंदा की है और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। विजयन ने फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया कि ये बयान संघ परिवार की 'विरोध की आवाज को खत्म करने वाली सोच' को दिखाते हैं। उन्होंने यूडीएफ सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह आरएसएस को खुश करने के लिए पुलिस और कानूनी व्यवस्था को केवल मूकदर्शक बनाकर रख रही है।