उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र में से भी नक्सलियों की इसी तरह की सक्रियता के इनपुट आ रहे हैं। छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा जैसे राज्यों में नई भर्ती के लिए नक्सलियों ने गांवों में संपर्क बढ़ा दिया है।
सीआरपीएफ की इन सभी घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर है। सुरक्षाबल के डीआईजी इंटेलीजेंस एम. दिनाकरण कहते हैं, वहां पर सुरक्षा बलों ने अपनी ठोस पकड़ बना ली है। लगातार ऑपरेशन के चलते नक्सलियों की कमर अब टूटने लगी है।
कश्मीर में पिछले साल अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद जो लॉकडाउन हुआ था, उससे आतंकियों की भर्ती प्रक्रिया ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी। जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह का कहना है कि आतंकी अब नए सदस्यों की भर्ती करने के लिए कोशिश कर रहे हैं।
दो-तीन वर्षों के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकियों के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन किए हैं। आतंकियों ने स्थानीय स्तर पर अनेक युवाओं को गुमराह कर उन्हें अपने संगठन में शामिल भी किया था।
सुरक्षा बलों ने जब 160 आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा, तो उन्होंने स्थानीय स्तर पर नई भर्ती के लिए हाथ-पांव मारने शुरू किए थे। करीब 140 स्थानीय युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए थे। इनमें से भी कई युवा वापस लौट आए, तो बहुत से मारे भी गए।