सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट हैं कि जैश के ओसामा बिन लादेन के अल-कायदा आतंकी संगठन से करीबी संबंध हैं। जैश का शीर्ष नेतृत्व 2017 में भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह के समझौते को नहीं मानने का एलान कर चुका है। पाकिस्तान के ओकारा जिले में 27 नवंबर, 2017 को हुए एक सम्मेलन में जैश के आकाओं ने ‘गजवा-ए-हिंद’ जारी रखने की घोषणा की थी।
लादेन को बचाने के लिए किया था भारतीय संसद पर हमला
खुफिया रिपोर्ट में यह भी है कि भारतीय संसद पर हमला कराने के पीछे जैश का मकसद 9/11 हमले के बाद अफगानिस्तान के तोरा-बोरा की पहाड़ियों की सुरंगों में अमेरिकी सेना से घिरे ओसामा बिन लादेन की मदद करना था। दरअसल अमेरिका ने इन पहाड़ियों में लादेन को घेरने के लिए एकतरफ से सेना लगाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान को दी थी।
जैश ने पाकिस्तानी सेना की घेरेबंदी के महज एक सप्ताह बाद भारतीय संसद पर हमला कर दिया था, जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का माहौल तकरीबन युद्ध शुरू होने तक पहुंच गया था। इस कारण पाकिस्तान को अफगानिस्तान सीमा से सेना हटाकर भारतीय सीमा पर लगानी पड़ी थी और लादेन आसानी से तोरा-बोरा से निकलकर पाकिस्तान पहुंच गया था, जहां वह अगले 10 साल तक छिपा रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह योजना पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने ही बनाई थी। इस दौरान जैश ने अल-कायदा के लड़ाकों और उनके परिवारों को भी अफगानिस्तान से निकालकर पाकिस्तान में अपने शिविरों में सुरक्षित पनाह दी थी और बाद में इन्ही लड़ाकों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ भी किया। इनमें खालिद शेख मोहम्मद भी शामिल था, जो 9/11 हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। खालिद शेख को कराची में छिपाया गया था।
पुलवामा में आतंकी हमले के बाद तैनात सुरक्षाकर्मी
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