पिछले तीन दिन के अंदर जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले में छह जवानों एवं एक नागरिक के मारे जाने के साथ ही इस साल अब तक राज्य में संघर्ष विराम उल्लंघन एवं हिंसा की घटनाओं में 25 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
पिछले एक दशक के दौरान पहली बार जनवरी और फरवरी में इतना ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। इससे पहले 2007 में जनवरी और फरवरी में 43 लोग मारे गए थे। इससे इस आशंका को बल मिलता है कि आने वाले दिनों में राज्य में आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी होगी।
अकेले इस साल जनवरी में संघर्ष विराम एवं आतंकी घटनाओं में छह जवानों सहित 14 लोग मारे जा चुके हैं। फरवरी में ऐसी घटनाओं में तेजी आई है। 4 फरवरी को सीमा पार से पहली बार मिसाइलें दागी गईं जिसमें सेना के एक कैप्टन और तीन जवान शहीद हो गए। इसके बाद सुंजवां कैंप पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें चार जवान और एक नागरिक की मौत हो गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीर पंजाल रेंज में बर्फ पिघलने के कारण आने वाले समय में सीमा पार से
आतंकियों की घुसपैठ की घटनाओं में बढ़ोतरी होने की आशंका है। इस साल अब तक संघर्ष विराम उल्लंघन की 240 घटनाएं हो चुकी हैं। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान सीमा पार से घुसपैठ कराने के लिए कुछ भी करने पर आमादा है।
जैश-लश्कर साथ-साथ
पिछले हफ्ते
लश्कर के कमांडर नवीद जट्ट के श्रीनगर के अस्पताल से फरार होने की घटना से सेना को बड़ा धक्का लगा है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि नवीद को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की जिम्मेदारी हिजबुल मुजाहिदीन ने ली है। इससे पता चलता है कि लश्कर और हिजबुल ने हाथ मिला लिया है। नवीद की घाटी के जैश प्रमुख रियाज नाइकू के साथ का हालिया फोटो इस ओर इशारा कर रहा है।
स्थानीय आतंकी बढ़े
इस समय जम्मू कश्मीर में जैश, लश्कर एवं अन्य संगठनों के करीब 360 आतंकी सक्रिय हैं। इनमें से लगभग 200 स्थानीय युवक हैं जबकि शेष पाकिस्तानी मूल के हैं। सीमा पर भारतीय सुरक्षा बलों की सख्ती के कारण पाकिस्तानी आतंकियों के लिए घुसपैठ करना मुश्किल होता जा रहा है। इसकी भरपाई करने के लिए आतंकी संगठनों ने स्थानीय युवकों को भर्ती करना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2017 में 126 स्थानीय युवकों ने आतंकवाद का दामन थामा, जबकि 2016 और 2015 में यह संख्या क्रमश: 87 और 64 रही थी।
पाक की नापाक हरकतें
वर्ष संघर्ष विराम उल्लंघन
2015 152
2016 228
2017 860
2018 240