टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार रमेश शाह के संबंध गोरखपुर के अलावा नेपाल में बड़े व्यापारियों से भी थे। वह पहले नेपाल के व्यापारियों के बैंक खातों में पैसा मंगाता, फिर केरल, कश्मीर सहित अन्य राज्यों में भेजता था। यही नहीं पैसा खपाने के लिए रमेश शाह प्लेटिनम और गोल्ड कार्ड धारकों की मदद लेता था। हर ट्रांजेक्शन पर उन्हें 15 से 20 हजार रुपये तक कमीशन दिया जाता था। अब एटीएस और एनआईए की टीम ऐसे कार्ड धारकों के साथ-साथ रमेश शाह के मददगार, व्यापारी और बैंक वालों की कुंडली खंगाल रही है।
एटीएस के मुताबिक दोनों ही कार्ड की मदद से रोजाना दो-दो लाख रुपये निकाले जा सकते हैं। इसी का फायदा रमेश उठाता था और कमीशन का लालच देकर करोड़ों रुपये की लेनदेन करता था। शुरुआती पूछताछ में इसकी पुष्टि होने के बाद एटीएस ने गोरखपुर से कारोबार करने वाले नेपाल के ऐसे व्यापारियों, रमेश शाह के मददगारों पर निगाह गड़ा रखी है।
रमेश को एटीएस ने रिमांड पर ले लिया है। जल्द ही एटीएस की टीम रमेश को लेकर गोरखपुर आएगी, फिर सगे-संबंधी और मददगारों से पूछताछ होगी। रमेश से उनका आमना-सामना कराया जाएगा। एटीएस के आईजी असीम अरुण का कहना है कि रमेश शाह के नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों के भूमिका की जांच होगी।
सगे-संबंधियों ने बनाई दूरी, घर पर सन्नाटा
गिरफ्तार रमेश शाह से सगे संबंधियों ने भी दूरी बना ली है। आसपास के लोग भी घरवालों से बातचीत करने से बच रहे हैं। शुक्रवार की दोपहर पिता और मां घर के अंदर मौजूद थे और बेटे को फंसाए जाने की बात दोहराते रहे। आरोपों से घिरे रमेश शाह के करीबी दोस्त भी घरवालों से मिलने नहीं पहुंचे। पिता और मां घर से बाहर निकलने में कतराते रहे।