राष्ट्रीय जांच एजेंसी 'एनआईए' ने आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने और उग्रवाद से संबंधित कैंप आयोजित करने जैसे गंभीर आरोपों में शामिल एक अमेरिकन सहित सात विदेशी नागरिकों के मामले में मंगलवार को चार्जशीट दाखिल की है। एनआईए ने आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 'यूएपीए' की धारा 18 लगाई थी। खास बात है कि चार्जशीट में सभी आरोपियों के खिलाफ यूएपीए की धारा हटाई गई है। चार्जशीट में केवल 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट', 2025 की धारा 21 और 23 लिखी है। ये दोनों धाराएं में फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस के स्तर पर समझौता योग्य (कंपाउंडेबल) अपराध की श्रेणी में आती हैं।
180 दिन पहले पकड़े गए थे आरोपी
सुप्रीम कोर्ट के वकील रोहित डंडरियाल, जिन्होंने अदालत के समक्ष आरोपियों का पक्ष रखा, ने अमर उजाला को बताया कि इस केस में जांच एजेंसी पर कई सवाल खड़े होते हैं। आरोपियों को 180 दिन पहले पकड़ा गया था। उस वक्त जांच एजेंसी ने आतंकी साजिश की बात कही थी। अधिवक्ता रोहित का कहना है कि उन्होंने जांच एजेंसी के समक्ष कहा था कि वे लोग घूमने आए थे। उनके पास सभी तरह के दस्तावेज थे। इसके बावजूद उन्हें तीस दिन की न्यायिक हिरासत में रखा गया। उसके बाद वह अवधि 90 दिन तक बढ़ा दी गई।
इस बीच आरोपियों के वकील ने जांच एजेंसी से आग्रह किया कि अब उन्हें छोड़ दिया जाए। हर एंगल से जांच हो चुकी है। तब जांच एजेंसी की तरफ से कहा गया कि अभी वायस सैंपल आदि लेने हैं। कई एंगल से जांच होनी है। इसके लिए अतिरिक्त 90 दिन का समय मांगा गया। एडवोकेट रोहित डंडरियाल के मुताबिक, 180 दिन की जांच के बाद भी जांच एजेंसी को यूएपीए जैसा अपराध नहीं मिला। जांच एजेंसी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि चार्जशीट में यूएपीए की धाराएं नहीं लगाई गई हैं। यह हैरान करने वाला केस है। जांच एजेंसी के वकील ने कोर्ट को बताया कि इस केस में यूएपीए के एंगल से जांच खत्म नहीं हुई है। फिलहाल इस धारा को जांच में पेंडिंग रखा गया है। आगे की जांच में अगर यूएपीए के तहत कोई अपराध बनता है तो राष्ट्रीय जांच एजेंसी, सप्लीमेंट्री आरोप पत्र दायर कर सकती है। 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट', 2025 की धारा 21 और 23 में तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक
राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा गिरफ्तार आरोपियों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक सहित छह यूक्रेनी नागरिक हुरबा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकिव मारियन, होंचारुक मक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं। इनके खिलाफ यूएपीए की धारा 18 समेत कई अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। 13 मार्च को अमेरिकन नागरिक वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था। यूक्रेन के नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ के एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया।
ट्रंप प्रशासन ने दिया दखल
इस केस में अमेरिकी नागरिक वैनडाइक के परिवार ने पिछले दिनों राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से यह अपील की थी। उसमें ट्रंप प्रशासन से वैनडाइक की रिहाई की गुजारिश की गई थी। इसके लिए वैनडाइक की मां शेरेन वैनडाइक ने कूटनीतिक दखल देने की मांग की। शेरोन वैनडाइक ने इस बारे में एक्स पर बयान भी जारी किया था। उन्होंने अपने बयान में कहा, यह हमारे परिवार के लिए मानवीय संकट का समय है। एरन वैनडाइक को लेकर उन्होंने कहा, वह संकट में फंसे लोगों की मदद करता है। मानवीय कार्यों में उसका जीवन ऐसे ही बीता है। इसके चलते हमने अमेरिकी सरकार से गुहार लगाई है कि एरन वैनडाइक को सुरक्षित तरीके से घर वापस लाया जाए।
इस मामले में कोर्ट को बताया कि ये सात विदेशी नागरिक म्यांमार जाने से पहले गैर-कानूनी तरीके से मिजोरम में दाखिल हुए थे। आरोप है कि उन्होंने वहां उन्होंने ऐसे 'एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स' को ट्रेनिंग दी, जो भारत में काम करने वाले आतंकवादी संगठनों का समर्थन करते हैं। इतना ही नहीं, वे ग्रुप म्यांमार के कई विद्रोही समूहों से जुड़े थे। वे म्यांमार की जुंटा 'सैन्य सरकार' को निशाना बनाते हैं।
अदालत को बताया गया कि आरोपियों ने इन समूहों के सदस्यों को ड्रोन से अटैक करने की ट्रेनिंग दी थी। दूसरे मुल्कों से उपकरण लाकर ड्रोन तैयार करना, यह भी प्रशिक्षण का एक हिस्सा था। ड्रोन के लिए उपकरण कहां से आएंगे, इस मामले में वैनडाइक और दूसरे आरोपियों की भूमिका बताई गई। आरोप है कि इन्होंने म्यांमार में एक यात्री विमान को भी निशाना बनाया। ये विदेशी नागरिक, ऐसे आतंकियों के संपर्क में थे, जिनके पास एके 47 जैसे घातक हथियार रहे हैं। जांच एजेंसी ने अदालत में इस बाबत कई पुख्ता सबूत भी पेश किए। आरोपियों के फोन की फोरेंसिक जांच में कई अहम जानकारी हासिल हुई थी।