अंगमाली-एर्नाकुलम महाधर्मप्रांत
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केरल के अंगमाली-एर्नाकुलम महाधर्मप्रांत के बिशप हाउस के बाहर शनिवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब पुलिस ने कई पादरियों को वहां से हटा दिया। दरअसल, ये पादरी एक अपोस्टोलिक प्रशासक द्वारा जारी कुछ दस्तावेजों की वापसी की मांग को लेकर अनिश्चिकालीन अनशन कर रहे थे।
कई पादरियों को आईं चोटें
पादरियों और विश्वासियों ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उनका कहना था कि पुलिस ने शनिवार की तड़के इन पादरियों को जबरदस्ती बिशप हाउस से बाहर निकाल दिया। टीवी चैनलों पर दिखाए गए दृश्य में कुछ पादरियों को पुलिस कार्रवाई में चोटें आती दिखीं।
पुलिस के साथ तीखी बहस
इसके बाद, कई विश्वासियों और पुरोहितों ने सेंट मेरी बेसिलिका में जमा होना शुरू किया, जहां इन पादरियों को स्थानांतरित किया गया था। पुलिस भी वहां बड़ी संख्या में मौजूद थी। इसके अलावा, विश्वासियों ने महाधर्मप्रांत मुख्यालय के बाहर पुलिस के साथ तीखी बहस की। उन्होंने एर्नाकुलम के एसीपी सी जयकुमार पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जयकुमार कह रहे थे कि सरकार अंगमाली-एर्नाकुलम महाधर्मप्रांत के खिलाफ है। हालांकि, अधिकारी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि यह सब खबर बनाने के लिए किया जा रहा है। हम उनसे बातचीत करके समस्या सुलझाने के लिए तैयार हैं।
क्यूरिया की बर्खास्तगी की मांग
इससे पहले शुक्रवार को महाधर्मप्रांत मुख्यालय में उस समय अराजक दृश्य देखने को मिले, जब कुछ पादरियों ने महाधर्मप्रांत के नए क्यूरिया की बर्खास्तगी की मांग की थी।
बता दें, क्यूरिया एक निकाय होता है जो चर्च को अच्छे तरीके से चलाने में मदद करता है। ये विरोधी पादरी अथिरूपथा समरक्षणा समिति से हैं। इनकी मांग है कि अपोस्टोलिक प्रशासक बॉस्को पुथुर द्वारा जारी दस्तावेजों को वापस लिया जाए, जो उनकी मान्यता के अनुसार कैनन और नागरिक कानूनों का उल्लंघन करते हैं।