नोटबंदी के चलते देशभर में मौतों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। बृहस्पतिवार को भी इसकी वजह से मेरठ, मंडी, प्रतापगढ़, कानपुर, बरेली, एटा, कासंगंज, अमरोहा, मुरादाबाद व हाथरस में 10 लोगों की मौत हो गई। इनमें तीन की हार्ट अटैक, एक की ब्रेन हैमरेज जबकि चार को नई करेंसी के अभाव में दवा न मिलने के चलते जान गंवानी पड़ी। इसके साथ ही विवाद के चलते मारपीट में घायल दो लोगों की मौत हो गई ।
मेरठ के गोलाकुआं स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा के बाहर बृहस्पतिवार को भी लाइन में लगे लिसाड़ीगेट थाना क्षेत्र के निवासी शहजाद (42) की हार्ट अटैक से मौत हो गई। परिवार में एक सप्ताह से चूल्हा जलाने के लिए रुपये नहीं थे। पड़ोसियों ने चंदा इकट्ठा करके युवक को दफनाने का इंतजाम किया।
इसी तरह प्रतापगढ़ में लालगंज कोतवाली के पूरे गिरधर सहाय तिना निवासी प्राइवेट लाइनमैन सुरेंद्र सिंह (28) को बुधवार दिनभर लाइन में लगने के बाद भी पैसा नहीं मिला। बृहस्पतिवार को भी वह लाइन में लगने के लिए पहुंचा। लेकिन भीड़ देखकर उसकी तबीयत बिगड़ गई। हृदयगति रुकने से उसकी मौत हो गई।
कानपुर मेें हैलट में भर्ती शकील (42) की नई करेंसी न होने के चलते बृहस्पतिवार को मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि हजार का नोट लेकर वे दो दिन मेडिकल स्टोर में घूमे लेकिन दवा नहीं मिली। बरेली में भी मेडिकल स्टोर ने पुराने नोट की वजह से बच्चे के पिता को दवा नहीं दी, जिससे सात वर्षीय मो. अजहर को जरूरी दवाएं वक्त पर नहीं दी जा सकीं और उसने डीडी पुरम स्टेडियम रोड स्थित केयर अस्पताल में दम तोड़ दिया। घटना मंगलवार देर रात डेढ़ बजे की है।