दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)
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दिल्ली उच्च न्यायालय में बृहस्पतिवार को एक याचिका दाखिल कर दूरसंचार कंपनियों और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) को उन दफ्तरों, दुकानों या व्यापारिक प्रतिष्ठानों से बिल का पैसा नहीं वसूलने का निर्देश देने की मांग की गई जो कोविड-19 के कारण लगे लॉकडाउन में अनिवार्य रूप से बंद हैं।
एक वकील ने अधिवक्ता अमित साहनी की मदद से याचिका दाखिल की जिन्होंने बताया कि इस पर शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है। याचिकाकर्ता एस के शर्मा ने दलील दी कि दुकानें, दफ्तर, व्यापारिक प्रतिष्ठान, कारखाने और लगभग सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान लॉकडाउन के दौरान सामाजिक दूरी बनाकर रखने के सरकार के निर्देश का पालन करने के लिए बंद हैं।
उन्होंने दलील दी कि टेलीफोन संचालकों और आईएसपी को नागरिकों से उन सेवाओं के लिए पैसे नहीं मांगने चाहिए जिनका उन्होंने सरकार के निर्देशानुसार कामकाज बंद होने के कारण इस्तेमाल ही नहीं किया। याचिका में कहा गया है कि अगर इस तरह का शुल्क कंपनियों द्वारा वसूला भी जाता है तो उस पैसे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोना वायरस से निपटने के लिए बनाए गए कोष में जमा करा देना चाहिए।