दूरसंचार विभाग (डॉट) सरकारी गैर दूरसंचार कंपनियों (पीएसयू) के मामले में 2.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के बकाये के भुगतान की 23 जनवरी की समयसीमा की कानूनी वैधता की जांच कर रहा है। सूत्रों ने ये जानकारी देते हुए कहा कि ये कंपनियां एजीआर मामले में सुप्रीम कोर्ट में मूल रूप से पार्टी नहीं थी।
डॉट के सूत्रों ने कहा कि भले ही सांविधिक बकायों से संबधित भुगतान के लिए गैर दूरसंचार पीएसयू से भी कहा गया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि 23 जनवरी की समयसीमा उन सरकारी कंपनियों पर भी कानूनी रूप से लागू है, जो इस विवाद में सीधे पार्टी नहीं थीं।
ऐसा लगता है कि वर्तमान में डॉट के भीतर यह राय उभर रही है कि अदालत द्वारा लागू की गई समयसीमा पीएसयू पर लागू नहीं होती है, लेकिन स्पष्टता के लिए कानूनी पहलुओं पर गौर किया जा रहा है। एक सूत्र ने कहा, ‘वास्तव में अदालत ने एजीआर के सिद्धांक के मसले पर फैसला दिया है, इसलिए उन्हें (पीएसयू) भुगतान करना है, लेकिन यदि वे 23 जनवरी तक भुगतान नहीं करती हैं तो इसे अदालत की अवमानना नहीं माना जाएगा।’