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SLBC Tunnel Collapse: हादसे के पांच दिन बाद घटनास्थल तक पहुंच सकी बचाव टीम, फंसे मजदूरों की अब भी कोई खबर नहीं

Wed, 26 Feb 2025 11:45 AM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद

सार

SLBC Tunnel Collapse: एसएलबीसी सुरंग में हुए हादसे के बाद बचाव अभियान में लगे एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और रैट माइनर्स की 20 सदस्यीय टीम पांच दिन बाद हादसे वाली जगह पर पहुंच गई है। लेकिन अभी तक फंसे मजदूरों का कोई भी पता नहीं चल सका है।
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श्रीशैलम लेफ्ट बैंक सुरंग के पास रेस्क्यू टीम - फोटो : PTI
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विस्तार
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तेलंगाना के नागरकुरनूल के जिले में एसएलबीसी सुरंग में हुए हादसे को आज पांच दिन हो गए हैं। वहीं एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, सुरंग में फंसे आठ लोगों को बचाने में लगे विशेषज्ञों की एक टीम सुरंग के अंत तक पहुंचने और वापस लौटने में सफल रही है। अब तक टीमें केवल कीचड़ और मलबे के कारण सुरंग के अंत से 50 मीटर पहले तक ही पहुंच पाई हैं। मामले में नागरकुरनूल के पुलिस अधीक्षक वैभव गायकवाड़ ने बताया 'एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और रैट माइनर्स की 20 सदस्यीय टीम (सुरंग) के अंतिम बिंदु तक पहुंचने में सफल रही। लेकिन वहां बहुत अधिक मलबा था। वे इस पर काम कर रहे हैं कि कैसे आगे बढ़ना है'।
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हादसे के पांच दिन बाद घटनास्थल तक पहुंची बचाव टीम
अधिकारी ने आगे बताया कि, 'एक दिन पहले वे 40 मीटर (सुरंग के अंत से पहले) तक पहुंचने में सक्षम थे। कल वे उस 40 मीटर तक भी पहुंच गए'। वैभव गायकवाड़ ने आगे कहा कि टीम ने स्थान पर खोज की, लेकिन कल रात कुछ भी नहीं मिला। उन्होंने कहा कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की टीम ने नमूने एकत्र किए हैं, लेकिन अभी तक मिट्टी की ताकत और अन्य पर अपनी रिपोर्ट नहीं दी है।

सुरंग में लगातार भेजी जा रही ऑक्सीजन- उत्तम कुमार
इससे पहले सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा था कि फंसे हुए लोगों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है, हालांकि सुरंग में लगातार ऑक्सीजन पंप की जा रही है। 22 फरवरी को सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने के बाद श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) सुरंग परियोजना पर काम कर रहे आठ कर्मी फंस गए थे।
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खोजी कुत्तों का इस्तेमाल किया जाएगा- कलेक्टर
श्रीशैलम लेफ्ट बैंक नहर सुरंग के अंदर कीचड़ जमने लगा है, इसलिए बचाव दल फंसे हुए लोगों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों का इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है। मामले की जानकारी देते हुए, जिला कलेक्टर बी संतोष ने कहा कि राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) से आज मिट्टी के स्थिरीकरण और अन्य मुद्दों पर अपनी राय देने की उम्मीद है, जिसके आधार पर कार्य योजना का मसौदा तैयार किया जाएगा।

संतोष ने यह भी कहा कि टीमें थर्मल फिशिंग बोट का उपयोग करके सुरंग के अंदर दुर्घटना स्थल तक पहुंचने में सक्षम थीं। शुरू में दुर्घटनास्थल से 40 मीटर की दूरी थी। वहां कीचड़ था। लेकिन अब वह अधिकतम सीमा तक जम गया है। इसलिए टीम दुर्घटनास्थल तक जा सकती है... इसलिए खोजी कुत्ते की मदद से हम फंसे हुए लोगों का पता लगाने की कोशिश करेंगे।' उन्होंने आगे कहा कि प्राथमिकता व्यक्तियों का पता लगाना है। कलेक्टर ने कहा कि अधिकारियों को उम्मीद है कि कन्वेयर बेल्ट आज काम करना शुरू कर देगा और आगे की खुदाई के लिए टनल बोरिंग मशीन में कुछ जगह बनानी होगी। 
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