किसानों को लुभाने की कोशिश
राज्य की बीआरएस सरकार ने किसानों की आय दो गुना करने का दावा किया है। उसका कहना है कि किसानों के लिए विशेष योजनाएं चलाकर उनकी स्थिति को बेहतर करने का प्रयास किया गया है। उन्हें कम कीमतों पर बिजली दी जा रही है तो सिंचाई के लिए बेहतर व्यवस्था कर उनका कृषि क्षेत्र बढ़ाने के लिए प्रयास किए गए हैं।
तेलंगाना की केसीआर सरकार ने मल्टी-स्टेज लिफ्ट सिंचाई परियोजना शुरू की है। रायथु बंधु योजना, रायथु बंधु किसान बीमा योजना, तेलंगाना यंत्र लक्ष्मी जैसी किसान योजनाओं को लागू कर उनकी स्थिति बदलने के प्रयास किए गए हैं। चरणबद्ध तरीके से की गई किसान ऋण माफी लागू कर किसानों को कर्ज के जाल से मुक्त करने का काम किया गया है। इससे किसानों की स्थिति में सुधार हुआ है। वे ज्यादा आत्मनिर्भर हुए हैं। सरकार का अनुमान है कि उसे इसका चुनावी लाभ मिल सकता है।
कांग्रेस का भी किसानों पर दांव
राजस्थान-मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मुफ्त की अनेक योजनाओं की घोषणा कर कांग्रेस बढ़त बनाने की कोशिश कर रही है। उसने तेलंगाना में भी उसी योजना को आगे बढ़ाने का काम किया है। पार्टी का दावा है कि वह सत्ता में आने के बाद किसानों को मुफ्त बिजली, खाद-पानी पर सब्सिडी और विशेष किसान केंद्रित योजनाएं शुरू करेगी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राज्य की अपनी यात्रा के दौरान भी किसान केंद्रित योजनाएं चलाने की बात कह चुके हैं। इसलिए आगे आने वाले समय में राज्य में किसानों के मुद्दे पर बढ़चढ़कर घोषणाएं देखने को मिल सकती हैं। किसान किस राजनीतिक दल की बातों पर भरोसा करता है, यह देखने वाली बात होगी।
उत्तर भारत से अलग है दक्षिण की राजनीति
राजनीतिक टिप्पणीकार संजय शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि कई मायनों में दक्षिण भारत की राजनीति उत्तर भारत से अलग होती है। यहां मतदाता राजनीतिक दलों से सीधे मुफ्त की छूट पाने की उम्मीद करते हैं। विभिन्न योजनाओं के द्वारा वे सत्तारूढ़ दल से अपनी सीधी मदद चाहते हैं। ऐसे में यहांं उसी दल को सफलता मिलने की उम्मीद रहती है जो उन्हें सीधे मदद पहुंचाने में सफल होता है। चूंकि, बीआरएस सत्ता में है, विभिन्न योजनाओं के जरिए वह जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ साबित करने की कोशिश कर सकती है। इस कड़ी में वह पहली नजर में आगे दिखाई पड़ रही है।
लेकिन चूंकि, कांग्रेस ने विभिन्न राज्यों में अपनी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू कर लोगों का विश्वास जीता है, दक्षिण में ही कर्नाटक इसका एक बड़ा म़ॉडल बनकर उभर रहा है, कांग्रेस भी मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर सकती है। लेकिन जनता ने किसके वादों पर भरोसा किया, यह समझने के लिए चुनाव परिणामों तक का इंतजार करना पड़ेगा।