हैदराबाद की एक अदालत के आदेश पर तेलंगाना के आबकारी मंत्री वी श्रीनिवास गौड़ के खिलाफ चुनावी हलफनामे में छेड़छाड़ करने के आरोप में महबूबनगर जिले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। एफआईआर में गौड़ को प्रथम आरोपी बनाया गया है, जबकि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और कई अन्य अधिकारियों को सह-आरोपी बनाया गया है।
हैदराबाद में निर्वाचित सांसदों और विधायकों से संबंधित आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत ने महबूबनगर के एक निवासी की निजी शिकायत पर पुलिस को मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। 11 अगस्त को दर्ज की गई एफआईआर में तेलंगाना के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी शशांक गोयल और कई अन्य अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। इन पर शिकायतकर्ता ने गौड़ के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने 2018 के चुनावी हलफनामे में आगे की कार्रवाई किए बिना मामले को बंद कर दिया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि महबूबनगर से विधायक गौड़ ने तथ्यों को छिपाकर चुनावी हलफनामे में छेड़छाड़ की।
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि 2018 में श्रीनिवास गौड़ ने रिटर्निंग अधिकारी के साथ मिलकर गैरकानूनी तरीके से तीन हलफनामे दायर किए थे। यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन है। शिकायतकर्ता ने कहा कि मंत्री ने फॉर्म नंबर 26 में जमा किए गए 'दोषपूर्ण' हलफनामे को बदल दिया और मंत्री की पत्नी द्वारा बिक्री और आंध्र प्रदेश ग्रामीण विकास बैंक से प्राप्त 12 लाख रुपये के बंधक ऋण के माध्यम से अर्जित अचल संपत्ति से संबंधित महत्वपूर्ण विवरण छुपाए गए।
मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आरोपों की पुष्टि करने वाले दस्तावेज मुहैया कराने का निर्देश दिया। अदालत के आदेश का पालन करते हुए याचिकाकर्ता ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के माध्यम से दस्तावेज हासिल किए और उन्हें सबूत के रूप में प्रस्तुत किया। इसके बाद जुलाई में, विशेष अदालत ने महबूबनगर टाउन पुलिस को सीआरपीसी की धारा 156 (सी) के तहत श्रीनिवास गौड़ के खिलाफ मामला दर्ज करने और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।