तेलंगाना के पूर्व सीएम के चंद्रशेखर राव की बेटी और बीआरएस की पूर्व नेता के कविता ने आज अपनी पार्टी लॉन्च कर दी है। के कविता की पार्टी का नाम तेलंगाना राष्ट्र सेना है। महीनों पहले के कविता को उनके ही पिता की पार्टी बीआरएस से निलंबित कर दिया गया था। के कविता को बीते साल बीआरएस से निलंबित किया गया था।
के कविता की नई पार्टी की लॉन्चिंग हैदराबाद में हुई। खास बात ये है कि बीआरएस का पुराना नाम भी टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्र समिति) था, जिसे बाद में बदलकर बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) कर दिया गया था। नई पार्टी की लॉन्चिंग से पहले के कविता ने तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर 1969 में हुए आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। के कविता ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य के लोगों की इच्छाओं और अधूरे एजेंडे को पूरा करने पर फोकस करेगी।
पार्टी लॉन्चिंग में बोलीं के कविता- टीआरएस 95 फीसदी क्षेत्रीय मुद्दों पर फोकस करेगी
पार्टी लॉन्चिंग के दौरान के कविता ने कहा, 'हमने आज नई पार्टी लॉन्च की है, जिसे टीआरएस यानी तेलंगाना राष्ट्र सेना के नाम से जाना जाएगा। हमने चुनाव आयोग में भी आवेदन दिया है। हम उम्मीद कर रहे थे कि चुनाव आयोग की मंजूरी मिल जाएगी। हम उम्मीद कर रहे हैं कि तेलंगाना राष्ट्र सेना ही अंतिम नाम होगा। हमने इस नाम के लिए जीवन भर काम किया है। टीआरएस को सफल बनाने के लिए हमने 20 साल तक खून पसीना एक किया। हमने तेलंगाना को राज्य बनाने में सफलता हासिल की। दुर्भाग्य से इसके बाद चीजें गलत राह पर चली गईं और लोगों की इच्छाओं का सम्मान नहीं किया गया। न तो बीआरएस के 10 साल के शासन में और न ही कांग्रेस के दो साल के कार्यकाल में किसानों-युवाओं की उम्मीदें पूरी हुईं। टीआरएस पूरी तरह से क्षेत्रीय पार्टी होगी और ये 95 फीसदी क्षेत्रीय मुद्दों पर फोकस करेगी। हम ओबीसी को 50 फीसदी आरक्षण देने के मुद्दे पर भी लड़ाई लड़ेंगे।'
पिता-पुत्री के बीच मतभेद कैसे उभरे?
दरअसल के कविता और उनके पिता के चंद्रशेखर राव के बीच मतभेद उभर गए थे और इसकी वजह बीआरएस पार्टी को पितृसत्तात्मक तरीके से संचालित करना था। के कविता को हमेशा लगता था कि उनके भाई केटी रामाराव को उन पर तरजीह दी जा रही है। हालांकि बीआरएस के सत्ता में रहने के दौरान यह मुद्दा संभल गया, लेकिन अब जब बीआरएस सत्ता से बाहर है तो पार्टी के बीच नेतृत्व की रार सतह पर आ गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बात तब बढ़ी, जब साल 2023 में के कविता दिल्ली शराब घोटाले में जेल गईं। इस दौरान के कविता कई महीने जेल में रहीं, लेकिन उनके पिता के चंद्रशेखर राव एक भी बार उनसे मिलने जेल नहीं गए। इसके चलते के कविता की नाराजगी बढ़ गई। मई 2025 में के कविता ने सार्वजनिक तौर पर दिए अपने एक बयान में कहा कि तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा मिलने के बावजूद अभी भी राज्य में सामाजिक न्याय की कमी है। कविता के इस बयान को सीधे तौर पर अपने पिता के कार्यकाल पर निशाना साधने के तौर पर देखा गया। इसके बाद कविता ने अपने पिता को छह पन्नों का एक फीडबैक पत्र भेजा, जिसमें बीआरएस सरकार की आलोचना की गई थी। यह पत्र मीडिया में लीक हो गया था, जिसके बाद पिता और बेटी के बीच मतभेद और गहरा गए।