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पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहा राव के जन्मशताब्दी वर्ष की तैयारियां जोरों पर, पूरे साल होंगे कार्यक्रम

Fri, 26 Jun 2020 10:32 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
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पीवी नरसिंहा राव - फोटो : फाइल
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तेलंगाना में राज्य सरकार पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहा राव के जन्मशती वर्ष को पूरे धूमधाम से मनाने के लिए तैयार है। रविवार से शुरू हो रहे इस कार्यक्रम की तैयारियां हैदराबाद में हुसैननगर झील के किनारे नेकलेस रोड पर स्थित राव की समाधि ज्ञान भूमि पर पूरे जोर से हो रही हैं। 

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मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि राज्य की तेलंगाना राष्ट्र समिति सरकार ने पूरे साल चलने वाले इस कार्यक्रम के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। साल भर चलने वाले इन कार्यक्रमों के लिए राज्यसभा सदस्य के केशव राव की अगुवाई में एक समिति भी गठित की गई है। 

बयान के अनुसार, तमिलनाडु के रामेश्वरम में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के स्मारक की तर्ज पर हैदराबाद में राव का एक स्मारक स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही हैदराबाद, वरंगल, करीमनगर, दिल्ली में तेलंगाना भवन और राव की जन्मस्थली वांगरा में उनकी पांच कांस्य प्रतिमाएं भी लगाई जाएंगी। 
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राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कहा था कि तेलंगाना राज्य विधानसभा में  पूर्व प्रधानमंत्री राव का चित्र रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगले सत्र में राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा, जिसमें केंद्र से नरसिम्हा राव को उनकी जन्म शताब्दी के अवसर पर भारत रत्न देने की सिफारिश की जाएगी

मुस्लिम समुदाय में है नाराजगी

हालांकि, पूरे साल कार्यक्रम आयोजित करने के इस फैसले से राज्य के मुस्लिम समुदाय में नाराजगी है। जमात-ए-इस्लामी की तेलंगाना इकाई के प्रवक्ता हमीद मोहम्मद खान का कहना है कि सरकार ने पूरे साल कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला करके मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार खान ने कहा, 'यह सर्वज्ञात तथ्य है कि नरसिंहा राव अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के लिए जिम्मेदार थे। जब ढांचा विध्वंस हो रहा था तब वह जानबूझ कर चुप रहे थे। इस देश का मुसलमान उनकी इस ऐतिहासिक गलती को कभी नहीं भूलेगा।'

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देश के 10वें प्रधानमंत्री थे राव, ऐसा रहा राजनीतिक सफर

देश के 10वें प्रधानमंत्री राव पीवी नरसिंहा राव का जन्म 28 जून 1921 को करीमनगर में हुआ था। पेशे से कृषि विशेषज्ञ और वकील राव ने कई कुछ महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला। वे आंध्र प्रदेश सरकार में 1962 से 64 तक कानून एवं सूचना मंत्री, 1964 से 67 तक कानून एवं विधि मंत्री, 1967 में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री एवं 1968 से 1971 तक शिक्षा मंत्री रहे। वे 1971 से 73 तक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 

साल 1991 के आम चुनाव दो चरणों में हुए थे। पहले चरण के चुनाव के बाद 21 मई 1991 को राजीव गांधी की हत्या हो गई थी और दूसरे चरण के चुनाव इसके बाद हुए थे। इस चुनाव में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था लेकिन वह सबसे बड़े दल के रूप में उभरी था। कांग्रेस ने 232 सीटों पर जीत हासिल की थी और नरसिम्हा राव को कांग्रेस संसदीय दल का नेता बनाया गया था। ऐसे में उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया। सरकार अल्पमत में थी, लेकिन कांग्रेस ने बहुमत साबित करने के लायक सांसद जुटा लिए थे। 
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