माओवादियों के सर्वोच्च नेता तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने मंगलवार को तेलंगाना पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया है। उनके साथ तीन अन्य शीर्ष नक्सली भी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हो गए। टॉप माओवादी 'देवजी' 44 वर्षों से भूमिगत रहे हैं। मल्ला राजी रेड्डी संग्राम, सीसीएम, 46 वर्षों से भूमिगत, बड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर उर्फ जगन 28 साल से भूमिगत और नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना उर्फ सन्नू दादा, 36 साल से भूमिगत थे। इन सभी नक्सलियों को तेलंगाना सरकार ने राज्य एवं केंद्र की राहत एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत 90 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी है।
बता दें कि गत वर्ष मई में छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में हुई एक मुठभेड़ में 27 माओवादियों के साथ नंबाल्ला केशव राव उर्फ़ बसवराजू मारे गए थे। उसके बाद तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ही सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। टिपिरी थिरुपति उर्फ देवजी, केंद्रीय समिति सदस्य, पोलित ब्यूरो सदस्य और केंद्रीय सैन्य आयोग के प्रभारी सीपीआई (एम) रहे हैं।
फिलहाल वे केंद्रीय समिति में बतौर महासचिव पद पर थे। तिप्पिरी तिरुपति का जन्म वर्तमान जगतियाल ज़िले के एक दलित परिवार में हुआ था। वह 1980 के दशक में करीमनगर के एसआरआर कॉलेज में बीएससी की पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में आ गए। छात्र संगठनों के बीच हुए संघर्ष वे अंडरग्राउड हो गए थे। तिरुपति (देवजी) करीमनगर क्षेत्र में सक्रिय थे। देवजी वहीं से एक रेडिकल विद्यार्थी संगठन का हिस्सा बन गए।
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किसान के बेटे थे देवजी
तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी के पिता वेंकट नरसैया किसान थे। उनकी एक बड़ी बहन लीला और दो छोटे भाई (गंगाधर और वेंकट) हैं। देवजी ने जनवरी 1991 में महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले के लाहेरी पुलिस स्टेशन के गोपनार गांव की निवासी अरिके जैनी उर्फ सृजना से विवाह किया था। उस वक्त वे पेरीमेली दलम में पार्टी सदस्य थीं। उन्हें क्षेत्रीय समिति सदस्य (आरसीएम) के पद पर पदोन्नत किया गया। 2020 में महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले के कासनसुर वन क्षेत्र में हुई एक दुर्घटना में उनका निधन हो गया।
वे जनवरी 1982 में सीपीआई (एमएल) जनयुद्ध में शामिल हुए। अप्रैल 1984 में मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति द्वारा मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम के साथ उन्हें दंडकारण्य भेजा गया, जहां उन्होंने सशस्त्र दस्ते में काम किया। 1984 से अक्टूबर 1987 तक, वे सिरोंचा क्षेत्र के सशस्त्र दस्ते (दलम) के कमांडर रहे थे। बाद में उनका तबादला पेरिमिला दलम में कर दिया गया, जहां उन्होंने नवंबर 1987 से अक्टूबर 1989 तक कमांडर के रूप में कार्य किया। अप्रैल 1989 में, उन्हें संभागीय समिति सदस्य (डीवीसीएम) के रूप में पदोन्नत किया गया।
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उन्होंने गढ़चिरोली संभागीय समिति में भी कार्य किया। 1993 में, उन्हें उत्तरी गढ़चिरोली उप-संभागीय समिति का सचिव नियुक्त किया गया। सितंबर 1995 में, उन्हें विशेष क्षेत्रीय समिति सदस्य (एसजेडसीएम) के पद पर पदोन्नत कर सचिव के रूप में बांदारा संभागीय समिति का प्रभारी बनाया गया। जनवरी 2001 में उन्हें केंद्रीय समिति सदस्य के रूप में पदोन्नत किया गया और वे केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के सदस्य बने।
तेलंगाना सरकार की पुनर्वास नीति के अनुसार, तिपिरी तिरुपति उर्फ देवजी केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम) और पोलित ब्यूरो सदस्य (पीबीएम) पर पच्चीस लाख रुपये प्रदान किए गए हैं।
मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संगराम, केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम) को भी पच्चीस लाख रुपये, बड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर, राज्य समिति सदस्य (एससीएम) को बीस लाख रुपये और नूने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना, राज्य समिति सदस्य (एससीएम) को बीस लाख रुपये प्रदान किए गए हैं। राज्य एवं केंद्र की राहत एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत पात्र पुरस्कार राशि के तौर पर 90 लाख रुपये उन्हें डिमांड ड्राफ्ट/चेक के माध्यम से वितरित किए गए हैं।
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