महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राव ने दावा किया कि उन्होंने कई अन्य मुख्यमंत्रियों के साथ मिलकर भारत में फाइजर के लिए पैरवी की थी, लेकिन मोदी सरकार ने भारत में फाइजर के टीकों को अनुमति नहीं दी।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कोविड-19 के विदेशी टीकों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। चंद्रशेखर राव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने फाइजर कंपनी के कोविड-19 टीकों के आयात को जबरदस्ती रोकने के लिए हर संभव कोशिश की, जबकि लोग इन टीकों को लेने के लिए तैयार थे।
विज्ञापन
रविवार को महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राव ने दावा किया कि कई अन्य मुख्यमंत्रियों के साथ मिलकर भारत में फाइजर के लिए पैरवी की थी, लेकिन मोदी सरकार ने भारत में फाइजर के टीकों को अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि जनता सबसे अच्छी वैक्सीन लेना चाहती थी, लोग भी इसे खरीदना चाहते थे, फिर भी कंपनी को जबरन रोका गया। हमने भी कोशिश की, कई मुख्यमंत्रियों ने पीएमओ और नीति आयोग से भी बात की लेकिन सरकार ने कंपनी को अनुमति नहीं दी।
चीन छोड़ने वाली कंपनियों को भारत में न लाने पर भी उठाए सवाल
चंद्रशेखर राव ने कहा कि मेक इन इंडिया एक जोक इन इंडिया बन गया है। आज कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन छोड़ रही हैं, लेकिन हम उन्हें आकर्षित क्यों नहीं कर पा रहे हैं? वे कंपनियां हमारी ओर क्यों नहीं मुड़ रही हैं? अगर मेक इन इंडिया सही होता, तो ईज ऑफ डूइंग सही होती, अगर वे व्यवहार्य होतीं। फिर भारत आने की अनुमति क्यों नहीं दी गई? उन्होंने दावा किया कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां जो फाइजर की तरह चीन छोड़ रही थीं, उन्हें भारत में प्रवेश करने से रोका जा रहा था और केंद्र सरकार क्रोनी पूंजीवाद को प्रोत्साहित करने और लोगों को गुमराह करने के लिए मेक इन इंडिया के नारों को बढ़ावा दे रही थी। केंद्र पर निशाना साधते हुए राव ने आगे आरोप लगाया, वे उनके लिए काम करेंगे जो उनके दोस्त हैं। अपने शेयर बाजार को बढ़ाएंगे, वे दूसरों को क्यों आने देंगे?
विज्ञापन
हालांकि केंद्र सरकार ने कहा था कि वे फाइजर और मॉडर्ना से कोविड-19 वैक्सीन नहीं खरीदेंगे क्योंकि स्वदेशी वैक्सीन अधिक किफायती और स्टोर करने में आसान होगी।