भारत के साथ द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर के बाद इस्राइल अब आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। इसी दिशा में इस्राइल अब भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) आधारित लेन-देन को संभव बनाने के लिए एक साझा प्रणाली पर काम कर रहा है। इस्राइल के वित्त मंत्रालय के महालेखाकार याली रोथेनबर्ग ने यह जानकारी दी।
पीटीआई के साथ एक इंटरव्यू में रोथेनबर्ग ने कहा कि भारत और इस्राइल के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की बातचीत भी 'बहुत ही कम समय में पूरी हो सकती है'। हालांकि, उन्होंने कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई। रोथेनबर्ग इस्राइल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच के नेतृत्व में भारत आए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हैं। इस यात्रा का एक अहम परिणाम रहा कि भारत और इस्राइल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता हुआ। इस समझौते पर नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके इस्राइली समकक्ष स्मोट्रिच ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते से दोनों देशों के निवेशकों को एक-दूसरे के देशों में निवेश करने में सहूलियत मिलेगी।
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रोथेनबर्ग ने कहा, यह अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। हम भारत के साथ अन्य समझौतों को भी आगे बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस्राइल भारत के साथ एक वित्तीय प्रोटोकॉल को बढ़ावा देना चाहता है, जिससे भारत में आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं के लिए बेहतर वित्तीय मदद मिल सकेगी। इस्राइल ने इस तरह के प्रोटोकॉल पहले भी कई बड़े देशों के साथ किए हैं, जिनमें सबसे बड़ा प्रोटोकॉल चीन के साथ है।
अक्तूबर 2023 से इस्राइल और हमास के बीच जारी संघर्ष के बावजूद रोथेनबर्ग का मानना है कि पश्चिम एशिया में हालात पहले से बेहतर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस्राइल में अब पहले जैसा भू-राजनीतिक जोखिम नहीं है और युद्ध का असर देश की अर्थव्यवस्था पर सीमित रहा है। उन्होंने इस्राइल को संघर्षों के बीच मजबूती से खड़ा रहने वाला देश बताया और कहा कि वह चाहते हैं कि भारतीय कंपनियां इस्राइल की सार्वजनिक निविदाओं (टेंडर) में भाग लें, अगर उनके पास जरूरी अनुभव हो।
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रोथेनबर्ग ने कहा कि आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए भारत और इस्राइल जल्द एक ऐसा समझौता कर सकते हैं, जिससे भारतीय लोग इस्राइल में यूपीआई के जरिए स्थानीय मुद्रा (रुपये) में भुगतान कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया का नेतृत्व इस्राइल का केंद्रीय बैंक (बैंक ऑफ इस्राइल) कर रहा है और इस समझौते के लिए प्रस्ताव कुछ महीनों में तैयार हो सकता है। इस व्यवस्था से भारत और इस्राइल में भुगतान प्रणालियां सीधें आपस में जुड़ जाएंगी।
बैंक ऑफ इस्राइल देश की भुगतान व्यवस्था की देखरेख करता है और मासव नाम की प्रणाली चलाता है। रोथेनबर्ग ने कहा, हमें बताया गया है कि 2026 की पहली तिमाही के अंत तक इस्राइल में स्थानीय मुद्रा में भुगतान करना और प्राप्त करना संभव होगा, वो भी यूपीआई प्रणाली के जरिए। उन्होंने आगे कहा कि इस्राइल के लोग भी भारत में इस प्रणाली के जरिए अपनी स्थानीय मुद्रा में भुगतान कर सकेंगे।