लड़ाकू विमान तेजस के इंजन बनाने के लिए अमेरिकी कंपनी जीई और भारतीय कंपनी एचएएल के बीच करार हो गया है। तकनीकी दक्षता के लिहाज से यह भारत के लिए अहम बात है।
दिग्गज अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक एयरोस्पेस और भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) मिलकर भारत में ही लड़ाकू विमानों के इंजन बनाएंगी। समझौते के मुताबिक अमेरिका अपने एफ-414 जेट इंजन की 80% निर्माण तकनीक और बौद्धिक संपदा अधिकार भारत को देगा। अब तक अमेरिका ने इतनी उच्चस्तरीय तकनीक किसी भी गैर-नाटो सहयोगी देश के साथ साझा नहीं की है। समझौता विशेष रूप से भारत के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तेजस मार्क-2 के लिए किया गया है। तेजस मार्क-1ए में इससे कम शक्ति वाला इंजन लगा है।
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वायुसेना को मिलेगी ताकत
वायुसेना फिलहाल फाइटर स्क्वाड्रन संख्या में कमी से जूझ रही है। देश में इंजन उत्पादन शुरू होने से तेजस कार्यक्रम में तेजी आएगी। इससे वायुसेना की मारक क्षमता मजबूत होगी। हाल में विदेश सचिव विक्रम मिसरी व अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के बीच बैठक के बाद इस बारे में तेजी आई है। उम्मीद है कि साल के अंत तक दोनों देश अंतिम अनुबंध पर दस्तखत कर लेंगे।