भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने तेजस मार्क-1 लड़ाकू विमान हादसे, एलसीए मार्क 1ए और भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एएमसीए को लेकर अहम जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि दुबई एयर शो में 21 नवंबर 2025 को हुए तेजस हादसे की तकनीकी जांच अभी जारी है और अंतिम विश्लेषण के लिए कुछ कंपोनेंट हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
तेजस हादसे की जांच अभी जारी
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि दुबई एयर शो में तेजस के क्रैश की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि तकनीकी विश्लेषण के लिए कुछ कंपोनेंट की जरूरत है, जिन्हें हासिल करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि इन कंपोनेंट के मिलने और अंतिम तकनीकी विश्लेषण के बाद ही हादसे से जुड़े सवालों का जवाब दिया जा सकेगा।
LCA Mark 1A की इंडक्शन पर क्या बोले?
एलसीए मार्क 1ए को लेकर एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इस मामले में पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में देरी का कारण इंजन की उपलब्धता थी और पर्याप्त इंजन नहीं मिल पा रहे थे। अब इंजन प्राप्त हो चुके हैं और उन्हें विमानों में लगाया जा चुका है। फिलहाल विमानों का उचित और पूरी तरह से परीक्षण किया जा रहा है, ताकि आधिकारिक तौर पर उन्हें वायुसेना में शामिल किया जा सके।
उन्होंने कहा कि अभी दो या तीन तकनीकी बिंदुओं का परीक्षण पूरा होना बाकी है। उम्मीद है कि अगले एक-दो महीने में इन तकनीकी मुद्दों को दूर कर लिया जाएगा। इसके बाद एलसीए मार्क 1ए को वायुसेना में शामिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा। एयर मार्शल ने कहा कि वायुसेना भी एलसीए मार्क 1ए के इंडक्शन का बेसब्री से इंतजार कर रही है।
AMCA को लेकर भी दी जानकारी
पांचवीं और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से जुड़े सवाल पर एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि इसके दो पहलू हैं। उन्होंने बताया कि भारत अपना पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान एएमसीए विकसित कर रहा है। उनके मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने एएमसीए परियोजना के लिए अपनी तकनीकी क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता को पूरी तरह लगाया हुआ है।
तरंग शक्ति 2026 में 65 देशों को न्योता
एयर मार्शल दीक्षित ने तरंग शक्ति 2026 को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक विदेशी वायुसेनाओं के साथ परिचालन अभ्यास मुख्य रूप से द्विपक्षीय रहे, यानी एक समय में एक ही साझेदार देश के साथ अभ्यास किया जाता था। उन्होंने बताया कि 2024 में भारतीय वायुसेना ने पहली बार एक बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास के लिए कई विदेशी वायुसेनाओं को एक साथ शामिल किया। अब इस अनुभव को आगे बढ़ाते हुए तरंग शक्ति 2026 आयोजित करने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 65 मित्र देशों को निमंत्रण भेजा गया है।
आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप पर जोर
एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और युद्ध का स्वरूप भी बदल रहा है। हालिया संघर्षों ने सटीक हमले, एकीकृत रक्षा, मानवरहित प्रणालियों, सूचना वर्चस्व, अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन में इन सभी क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल करने के महत्व को सामने रखा है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भी इनमें से कई पहलुओं को भारतीय वायुसेना के लिए रेखांकित किया। उनके मुताबिक, इसमें खुफिया जानकारी पर आधारित ऑपरेशन, सटीक कार्रवाई, एकीकृत वायु और मिसाइल रक्षा, काउंटर-यूएएस और अलग-अलग डोमेन के बीच संयुक्तता के महत्व को देखा गया।