दिल्ली हाईकोर्ट से बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव की पत्नी शर्मिला को राहत मिली है। अदालत ने बीएसएफ को निर्देश दिया कि शर्मिला को अपने पति से मिलने व उसे दो दिन यादव के साथ रहने की इजाजत दी जाए। अदालत ने बीएसएफ के उस तर्क को खारिज कर दिया कि शर्मिला द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका औचित्यहीन है।
तेज बहादुर यादव जवानों को घटिया खाने संबंधी वीडियो सोशल मीडिया पर डालने से विवादों में आ गया था। शर्मिला ने दायर याचिका में यादव की जान को खतरा बताते हुए आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने उसे बंधक बना लिया है। ऐसे में अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि यादव को अदालत के समक्ष पेश किया जाए।
न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की खंडपीठ ने गृह मंत्रालय व बीएसएफ के उस तर्क पर असहमति जताई कि यादव लापता नहीं है और उसे एक बटालियन से दूसरी काली बाड़ी सांबा स्थित बटालियन में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके अलावा वह नियमित रूप से अपने परिवार से फोन पर संपर्क में है। ऐसे में याचिका पर सुनवाई नहीं की जानी चाहिए।