देश में बाल यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों से निपटने के लिए केंद्र सरकार, इंटरपोल, ब्रिटेन और अमेरिकी संस्थाओं से मदद ले रही है। ऑनलाइन चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर रोक लगाने की खातिर 19 हजार लोगों की एक खास टीम तैयार की गई है। इस टीम में पुलिस, न्यायिक अधिकारी, अभियोजक, साइबर क्राइम एवं फोरेंसिक जांच विशेषज्ञ शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय में स्थापित भारतीय साइबर समन्वय केंद्र 'आई4सी' अब देश में ऑनलाइन चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामलों पर पैनी नजर रख रहा है। ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई हो सके, इसके लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल को कार्यशील बनाया गया है। सभी राज्यों की साइबर अपराध यूनिट को पोर्टल एवं 'आई4सी' से जोड़ कर यह सुनिश्चित किया गया है कि बाल यौन शोषण के आरोपी जल्द से जल्द कानून के शिकंजे में आ जाएं।
साइबर अपराधों में हो रही बढ़ोतरी
केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा के अनुसार, साइबर स्पेस के उपयोग में वृद्धि होने के कारण महिलाओं और बच्चों के प्रति साइबर अपराधों में भी बढ़ोतरी हो रही है। केंद्र सरकार ने आईटी अधिनियम 2000 की धारा 67ख के तहत सुस्पष्ट यौन कृत्य आदि में बच्चों को प्रदर्शित करने वाली सामग्री का इलेक्ट्रॉनिक रुप में प्रकाशन, ब्राउजिंग अथ्वा प्रसारण करने के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। अधिनियम की धारा 66ड, 67 व 67क में शारीरिक निजता का उल्लंघन करने तथा अश्लील यौन सामग्री के इलेक्ट्रॉनिक रुप में प्रकाशन अथवा प्रसारण के लिए दंड और जुर्माने का प्रावधान है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा शिकायत किए जाने पर, मध्यवर्ती संस्था, 24 घंटे के भीतर ऐसी किसी सामग्री को हटाएगी, जो प्रथम दृश्ट्या ऐसे व्यक्ति के निजी अंग को प्रदर्शित करती हो। ऐसे व्यक्ति को पूर्ण अथवा आंशिक रुप से नग्न दर्शाती हो, या ऐसे व्यक्ति को किसी यौन कृत्य अथवा आचरण में लिप्त दर्शाती हो, अथवा वह साम्रग्री ऐसे व्यक्ति की कृत्रिम रुप से बदली गई 'मार्फ' तस्वीरों सहित किसी इलेक्ट्रॉनिक स्वरुप में प्रतिरूपण की प्रकृति को हो।
इंटरपोल से ली जा रही है मदद
केंद्र सरकार द्वारा इंटरपोल से संबंधित राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के माध्यम से प्राप्त इंटरपोल की वर्स्ट ऑफ लिस्ट के आधार पर बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री 'सीएसएएम' रखने वाली वेबसाइटों को आवधिक तौर पर ब्लॉक कराया जा रहा है। इसके साथ ही संबंधित इंटरनेट सेवा प्रदाताओं 'आईएसपी' को इंटरनेट वॉच फाउंडेशन 'आईडब्लूएफ' यूके से नियमित आधार पर सीएसएएम वेबसाइट या वेबपेजों की सूची प्राप्त करने के लिए उपयुक्त व्यवस्था करने और पोर्नोग्राफी से संबंधित वेबसाइट या वेबपेजों तक पहुंच को अवरुद्ध करने का आदेश दिया गया है। एनसीआरबी ने अमेरिकी की संस्था नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन 'एनसीएमईसी' के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके द्वारा 'एनसीएमईसी' से ऑनलाइन चाइल्ड पोर्नोग्राफी और बाल यौन शोषण सामग्री संबंधी टिपलाइन रिपोर्ट प्राप्त की जा सकती है। अब 'एनसीएमईसी' से प्राप्त टिपलाइन आगे कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ ऑनलाइन साझा की जा रही है।
शुरू की गई फोरेंसिक सह-प्रशिक्षण लैब
गृह मंत्रालय के सहयोग से 28 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में साइबर फोरेंसिक सह प्रशिक्षण लैब शुरु की गई हैं। जांच और अभियोजन का बेहतर ढंग से निपटान करने के लिए, विधि प्रवर्तन एजेंसियों के कार्मिकों, अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। सभी राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें। महिलाओं और बच्चों के प्रति साइबर अपराध के निवारण की स्कीम के तहत 19600 से अधिक विधि प्रवर्तन एजेंसी 'एलईए' कार्मिकों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध संबंधी जागरुकता जांच व फोरेंसिक आदि में प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की ऑनलाइन सूचना देने के लिए नागरिकों को एक केंद्रीयकृत तंत्र उपलब्ध कराने के लिए 'राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल' को कार्यशील बनाया है। यहां से सभी सूचनाओं को समय पर राज्यों की विधि प्रवर्तन एजेंसियों के पास भेज दिया जाता है।