निरुपम ने आगे कहा कि ऐसा लगाता है मानो सीएम और सीएमओ इतना बड़ा बिल बनाने के लिए गोल्डन चाय पीते हैं। एक तरफ महाराष्ट्र में रोजाना ना जाने कितने किसानों की मौत हो रही है और वहीं दूसरी तरफ सीएमचाय पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं।
निरुपम यहीं नहीं रुके और चूहे घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि क्या
मंत्रालय के चूहे चाय पीते हैं? उनका यह इशारा सीधे तौर पर पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे के बयान की तरफ था। जिसमें उन्होंने दावा करते हुए कहा था कि उन्होंने महज एक हफ्ते में 319,400 चूहों को मारा है। हालांकि चूहों के मामले पर बाद में मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने चूहों को मारने के लिए 3,19,400 चूहा नाशक दवाओं का प्रयोग किया है।
निरुपम के लगाए इन सभी आरोपों पर सीएमओ ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने
आरटीआई में दी गई जानकारी का गलत प्रयोग किया है। यह रकम सिर्फ चाय पर ही नहीं बल्कि नाश्ता, खाना, मंत्रिमंडल बैठकों में परोसा जाने वाला खाना, सत्कार के लिए इस्तेमाल होने वाले फूलों के बुके, शॉल, गिफ्ट, विभिन्न विभागों की बैठकें और मुख्यमंत्री से मिलने आने वाले शिष्टमंडल के स्वागत आदि पर खर्च हुई है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री सचिवालय ने कहा कि पहले मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित बैठकों का खर्च संबंधित विभाग उठाते थे। जिसका भुगतान अब मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा किया जाता है। खर्च बढ़ने का एक अन्य कारण है बैठकों की संख्या और महंगाई में हुई वृद्धि। साथ ही मुख्यमंत्री से मिलने आने वाले लोगों की संख्या में भी
इजाफा हुआ है।