टी बोर्ड ने दार्जिलिंग के चाय उद्योग के लिए केंद्र को 100 करोड़ के पैकेज का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि उद्योग ने इससे बड़े पैकेज की मांग की थी। लगभग साढे़ तीन महीने तक बंद रहने के बाद इलाके के बागानों में अब दोबारा कामकाज शुरू हो रहा है।
दार्जिलिंग टी एसोसिएशन (डीटीए) ने उत्पादन में नुकसान की भरपाई और दोबारा उत्पादन शुरू होने तक मजदूरों के वेतन-भत्तों के भुगतान के लिए टी बोर्ड से विशेष पैकेज की मांग की थी। टी बोर्ड के अध्यक्ष पीके बेजबरुआ ने यहां पत्रकारों को बताया कि दार्जिलिंग के चाय उद्योग को संकट से उबारने के लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय को सौ करोड़ के पैकेज का एक प्रस्ताव भेजा गया है। बेमियादी बंद के चलते उद्योग को उत्पादन के मोर्चे पर भारी नुकसान हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार के लिए इलाके के 87 बागानों को हुए घाटे की भरपाई करना मुमकिन नहीं है। बेजबरुआ ने कहा कि राज्य के डुआर्स इलाके व दक्षिण भारत में लघु उत्पादकों को हरी पत्तियों की कीमतों में गिरावट की वजह से भारी नुकसान झेलना पड़ा है। लेकिन उनको महज हरी पत्तियों को फैक्टरी तक पहुंचाने के लिए डीजल की कीमतों का ही भुगतान किया जा रहा है। डीटीए सूत्रों ने बताया कि बंद खत्म होने के बावजूद अब तक 60 फीसदी मजदूर काम पर नहीं लौटे हैं।