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मंदिर बोर्ड ने सबरीमाला पर बातचीत के लिए शाही परिवार और पुजारी को किया आमंत्रित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Updated Mon, 15 Oct 2018 01:27 PM IST
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सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कई लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है। इस विरोध में पंडालम शाही परिवार के सदस्य और पुजारी भी शामिल हैं। लेकिन सरकार के लिए भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करना बेहद जरूरी है। इसके लिए बहुत से प्रयास किए जा रहे हैं। अब इसी क्रम में त्रावणकोर देवासम बोर्ड (टीडीबी) ने मंगलवार को एक और बैठक बुलाई है। इस बैठक में मंदिर के पुजारी, पंडालम शाही परिवार के सदस्य और अयप्पा सेवा संघ को भी आमंत्रित किया गया है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ चल रहे अभियान का नेतृत्व कर रही है और बातचीत के लिए भी इंकार कर चुकी है। जबकि शाही परिवार और पुजारी ने कहा है कि वह बाद में अपना फैसला बताएंगे।



टीडीबी के अध्यक्ष ए. पदमाकुमार का कहना है, 'इस मुद्दे का भी हल हो जाएगा। हम सभी हितधारकों को धैर्यपूर्वक सुनेंगे। हम इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते। साथ ही हम उन्हें अपनी सीमाओं के बारे में भी समझाएंगे।' अब केवल तीन दिन रह गए हैं जब मंदिर मासिक पूजा के लिए खुलेगा। भारी संख्या में हो रहे विरोध के कारण राज्य सरकार चिंतित है।

भाजपा के राज्य अध्यक्ष पीएस श्रीधरन पिल्लई का कहना है, हम टीडीबी अध्यक्ष से ज्यादा उम्मीद नहीं करते हैं, वह सत्तारूढ़ सीपीआई(एम) के हाथ ही कठपुतली हैं।' वहीं तीन तांत्रिकों में से एक का कहना है, 'सरकार को फैसला आने के बाद से लोगों को विश्वास में लाना चाहिए था। उसे उत्तजक बयान नहीं देने चाहिए थे जैसे महिला पुलिस और अधिकारियों की तैनाती इससे लोगों में गुस्सा बढ़ा है। मुझे लगता है कि जो भी कुछ आज हो रहा है उसके लिए सरकार ही जिम्मेदार है।'

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सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कई लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है। इस विरोध में पंडालम शाही परिवार के सदस्य और पुजारी भी शामिल हैं। लेकिन सरकार के लिए भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करना बेहद जरूरी है। इसके लिए बहुत से प्रयास किए जा रहे हैं। अब इसी क्रम में त्रावणकोर देवासम बोर्ड (टीडीबी) ने मंगलवार को एक और बैठक बुलाई है। इस बैठक में मंदिर के पुजारी, पंडालम शाही परिवार के सदस्य और अयप्पा सेवा संघ को भी आमंत्रित किया गया है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ चल रहे अभियान का नेतृत्व कर रही है और बातचीत के लिए भी इंकार कर चुकी है। जबकि शाही परिवार और पुजारी ने कहा है कि वह बाद में अपना फैसला बताएंगे।

टीडीबी के अध्यक्ष ए. पदमाकुमार का कहना है, 'इस मुद्दे का भी हल हो जाएगा। हम सभी हितधारकों को धैर्यपूर्वक सुनेंगे। हम इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते। साथ ही हम उन्हें अपनी सीमाओं के बारे में भी समझाएंगे।' अब केवल तीन दिन रह गए हैं जब मंदिर मासिक पूजा के लिए खुलेगा। भारी संख्या में हो रहे विरोध के कारण राज्य सरकार चिंतित है।

भाजपा के राज्य अध्यक्ष पीएस श्रीधरन पिल्लई का कहना है, हम टीडीबी अध्यक्ष से ज्यादा उम्मीद नहीं करते हैं, वह सत्तारूढ़ सीपीआई(एम) के हाथ ही कठपुतली हैं।' वहीं तीन तांत्रिकों में से एक का कहना है, 'सरकार को फैसला आने के बाद से लोगों को विश्वास में लाना चाहिए था। उसे उत्तजक बयान नहीं देने चाहिए थे जैसे महिला पुलिस और अधिकारियों की तैनाती इससे लोगों में गुस्सा बढ़ा है। मुझे लगता है कि जो भी कुछ आज हो रहा है उसके लिए सरकार ही जिम्मेदार है।'

भाजपा ने बातचीत से किया इंकार

भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने राज्य सरकार के विरोध में बीते हफ्ते से लॉन्ग मार्च की शुरुआत की है, बिना फैसले की समीक्षा किए। अब यह मार्च तिरुवनंतपुरम तक पहुंच गया है।

सांसद एमपी सुरेश गोपी ने रैली निकालते हुए कहा है कि भाजपा के सभी कार्यकर्ता अपनी आखरी खून की बूंद तक लड़ाई करेंगे। ताकि सदियों पुरानी मंदिर की पवित्र परंपरा को बनाए रखा जा सके। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के भी हजारों लोगों ने रैली निकाली। युवा मोर्चा के समूह ने सीएम के आवास तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी लेकिन पुलिस ने उन्हें कुछ ही दूरी पर बैरिकेड की सहायता से रोक लिया।

मामले पर अभिनेता कमल हसन का भी बयान आया है। उनका कहना है, 'यह मामला सुप्रीम कोर्ट और भक्तों के बीच का है। मैं केवल एक दर्शक हूं। मैं इस बारे में कुछ कहने नहीं जा रहा हूं। मैं 'नो कमेंट्स' भी कहने नहीं जा रहा हूं।'
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