नासिक के टीसीएस दफ्तर में काम करने वाली एक युवती को मानसिक तनाव दूर करने के बहाने इस्लामिक कट्टरपंथियों के वीडियो दिखाकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया। मुख्य आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता का यौन शोषण किया और उसके बैंक खातों पर कब्जा कर लिया, जिसमें एक स्थानीय नेता ने आरोपियों की मदद की।
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टीसीएस के नासिक दफ्तर में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के सनसनीखेज मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस की ओर से अदालत में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, आरोपियों ने सोची-समझी साजिश के तहत एक हिंदू युवती को अपना निशाना बनाया। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि उसे मानसिक तनाव कम करने के बहाने पाकिस्तानी इस्लामिक प्रचारक तारिक जमील और भारत के विवादित वक्ता जाकिर नाइक के वीडियो देखने के लिए मजबूर किया गया।
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तनाव दूर करने के नाम पर मनोवैज्ञानिक खेल
23 वर्षीय पीड़िता ने पुलिस को दी अपनी गवाही में बताया कि आरोपियों ने उसकी मानसिक कमजोरी का फायदा उठाया। मुख्य आरोपी दानिश शेख ने पहले उससे हमदर्दी जताई और फिर धीरे-धीरे उसका ब्रेनवॉश करना शुरू कर दिया। दानिश ने पीड़िता से कहा कि वह मंदिर जाना और भगवान के भजन सुनना बंद कर दे, इससे उसका तनाव कम हो जाएगा। इसके बाद उसे 'तस्बीह' पढ़ने और 'अस्तगफार' करने के लिए कहा गया। दानिश के कहने पर ही अन्य आरोपी तौसीफ अत्तार और निदा खान ने उसे इस्लाम की शिक्षाएं देना शुरू किया। तौसीफ ने उसके मोबाइल पर यूट्यूब खोलकर जाकिर नाइक और पाकिस्तानी स्कॉलर डॉ. इसरार अहमद के भाषण दिखाए। पीड़िता ने कबूला कि लगातार की गई इस काउंसलिंग के कारण वह धीरे-धीरे उनकी बातों पर विश्वास करने लगी थी।
शादी का झांसा, बैंक खातों पर कब्जा और सियासी पनाह
चार्जशीट के अनुसार, दानिश शेख पहले से शादीशुदा था। इसके बावजूद उसने पीड़िता को शादी का झांसा देकर उसका लगातार यौन शोषण किया। इतना ही नहीं, दानिश ने धोखे से पीड़िता के बैंक खातों की पूरी जानकारी और उसका यूपीआई पिन भी हथिया लिया था, ताकि उसके पैसों पर नजर रखी जा सके। इस मामले में एक बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के कॉर्पोरेटर मतीन पटेल का नाम सामने आया। छत्रपति संभाजीनगर के कॉर्पोरेटर मतीन पटेल पर आरोप है कि उन्होंने अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद भी मुख्य महिला आरोपी निदा खान और उसके परिवार को छिपने के लिए पनाह दी। पूछताछ के दौरान मतीन लगातार पुलिस को गुमराह करते हुए कहते रहे, 'इम्तियाज जलील साहब को पूछना पड़ेगा।' हालांकि, सख्ती बरतने पर उन्होंने उस ठिकाने का खुलासा कर दिया।
106 गवाह और सरकार की कड़ी कार्रवाई
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले की चार्जशीट में कुल 106 गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं। इन गवाहों में पीड़िता, उसकी मां, टीसीएस के अधिकारी और पॉश कमेटी के सदस्य शामिल हैं। नासिक के इस दफ्तर से कुल नौ एफआईआर दर्ज हुई हैं, जिनमें से आठ मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में हैं। अन्य महिला कर्मचारियों ने भी जबरन नमाज पढ़वाने और खान-पान की आदतें बदलवाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस बीच, टीसीएस प्रबंधन ने साफ किया है कि कंपनी उत्पीड़न के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति रखती है और आरोपी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।