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भारत को टीबी मुक्त करने का पीएम मोदी का सपना रह गया अधूरा, पहले ही साल में टारगेट नहीं हुआ पूरा

Sat, 24 Nov 2018 03:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में टीबी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2025 में भारत को टीबी (क्षय) रोग से मुक्त कराने की घोषणा की थी। इसे पूरा करने के लिए सरकार ने क्षय मुक्ति को लेकर तैयार राष्ट्रीय योजना एनएसपी के तहत वर्ष 2018 से 2025 तक प्रत्येक साल मरीजों की पहचान का लक्ष्य भी निर्धारित किया, लेकिन सरकारी तंत्र पहले ही साल में टीबी मरीजों का टारगेट पूरा नहीं कर सका।
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2025 में भारत टीबी मुक्त अभियान पर उठे सवाल  

इसके पीछे निजी अस्पतालों की सक्रियता कम बताई जा रही है। निक्षय अभियान की रिपोर्ट के अनुसार इस साल 23 नवंबर तक देश में 17,99,838 मरीजों की पहचान हुई है, जिनमें करीब 23 फीसदी 4,26,359 मरीजों की पहचान निजी अस्पतालों में हुई है।

कई राज्यों में नहीं हो सकी पहचान, 2018 का लक्ष्य था 30 लाख

जबकि सरकार ने पूरे वर्ष में 30 लाख मरीजों की पहचान का लक्ष्य रखा था। इनमें 15-15 लाख मरीजों की रिपोर्टिंग सरकारी और निजी अस्पतालों को करनी थी। जाहिर है कि टीबी मरीजों को लेकर निजी अस्पताल और क्लिनिक की ओर से अभी भी सुस्त रवैया अपना जा रहा है।  

 

साल खत्म होने तक महज 17 लाख मरीजों की हो सकी पहचान    

जिन राज्यों में टीबी को लेकर सुस्त गतिविधि देखने को मिल रही है उनके आंकड़ें भी सामने आए हैं। जानकारों की मानें तो फिलहाल की स्थिति देख अगले सात वर्ष के भीतर देश को टीबी की बीमारी से आजाद कराना मुश्किल नजर आ रहा है।         

 

पीएम मोदी की घोषणा को लेकर सरकारी महकमों में हड़कंप     

जानकारी के अनुसार इस वर्ष सबसे ज्यादा टीबी मरीजों की पहचान उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश से हुई है। इन राज्यों में निजी चिकित्सीय क्षेत्र से करीब 28 फीसदी मरीजों की पहचान हुई है। बिहार और यूपी में क्रमश : 40 और 19 फीसदी निजी अस्पतालों ने टीबी मरीजों को लेकर गंभीरता दिखाई है।             

 
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इन राज्यों में मरीज मिले कम  

इस साल हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, गोवा, असम, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा जैसे राज्यों में सबसे कम टीबी मरीजों की जानकारी मिली है। जबकि पंजाब, उत्तराखंड, तेलंगना, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दिल्ली, छत्तीसगढ़ में निजी अस्पतालों से टीबी मरीजों की जानकारी कम मिली है।  
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