करदाता ने अगर अपनी संपत्ति को किराये पर दे रखा है तो उससे होने वाली आय के आधार पर संबंधित संपत्ति के होम लोन के ब्याज पर कर छूट की गणना की जाती है। ऐसे मकान मालिक संपत्ति से मिलने वाले वास्तविक किराये की 30 फीसदी राशि के बराबर स्टैंडर्ड डिडक्शन यानी कर छूट का दावा पेश कर सकते हैं।
वास्तविक किराये की गणना किसी वित्त वर्ष में मिले कुल किराये में से उस वित्त वर्ष में दिए गए निगम कर को घटाकर की जाती है। स्टैंडर्ड डिडक्शन और होम लोन के ब्याज की राशि को संपत्ति से मिलने वाले कुल किराये से घटाने के बाद जो राशि बचेगी, उसे ही करदाता की वास्तविक आय माना जाएगा और इसी पर कर देयता की गणना होगी।
अगर करदाता की ओर से होम लोन के रूप में चुकाया जाने वाला ब्याज उस संपत्ति से मिले किराये से ज्यादा है, तो नए टैक्स स्लैब के अनुसार यह घाटे का सौदा होगा। करदाता इस घाटे को अपनी अन्य आय जैसे वेतन, जमा ब्याज और पूंजीगत लाभ के साथ समायोजित भी नहीं कर सकेगा। यानी इस घाटे के सापेक्ष करदाता अपनी टैक्सेबल इनकम को कम नहीं कर सकेगा। इसके अलावा करदाता को घाटे की इस राशि को अगले वित्त में समायोजित करने की भी छूट नहीं दी जाएगी।
आयकर कानून के मौजूदा नियमों के तहत करदाता जिस मकान में रहता है, उसके होम लोन के ब्याज पर भी 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। साथ ही घाटे की स्थिति में इस राशि को अन्य आय के साथ समायोजित करने की भी सुविधा मिलती है और करदाता चाहे तो इस घाटे को अगले वित्त वर्ष में समायोजन का विकल्प भी चुन सकता है।