ग्रैच्युटी भुगतान संशोधन विधेयक 2017 का आने वाले बजट में पास होना लगभग तय है। इस विधेयक के पास होने पर सरकार ने संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिये कर मुक्त ग्रैच्युटी राशि की सीमा दोगुनी कर 20 लाख रुपये कर दी है।
वर्तमान में औपचारिक क्षेत्रीय कर्मचारी पांच या अधिक वर्षों तक काम करने के बाद नौकरी छोड़ने या सेवानिवृत होने पर 10 लाख रुपये की कर मुक्त ग्रैच्युटी के हकदार बनते हैं। लेकिन इस बिल के पास होने के बाद कर मुक्त
ग्रैच्युटी राशि की सीमा दोगुनी यानि 20 लाख रुपये हो जाएगी।
एक सूत्र के अनुसार, 'ग्रैच्युटी भुगतान संशोधन विधेयक 2017 संसद के बजट सत्र में पारित किया जाएगा, इस महीने के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।' उन्होंने बताया कि, सरकार एक संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए कर मुक्त 20 लाख की ग्रैच्युटी देना चाहती है जिससे वो केंद्र कर्मचारियों के समान आ सकें।
पिछले महीने लोकसभा में संसद के शीतकालीन सत्र में बिल पेश किया गया था। संसद द्वारा बिल पारित होने के बाद, सरकार को कर मुक्त ग्रैच्युटी की मात्रा तय करने के लिए इसे फिर से इसे लाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।
यह बिल सरकार को मातृत्व अवकाश और ग्रैच्युटी को सूचित करने की अनुमति देता है जो कि पहले केंद्रीय कानून के तहत काम करने वाले कर्मचारियों द्वारा प्राप्त ही किया जा सकता था।
यह बिल 18 दिसंबर, 2017 को लोकसभा में श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार द्वारा पेश किया गया था। केंद्रीय सिविल सेवाएं (पेंशन) नियम, 1972 के तहत ग्रैच्युटी के संदर्भ में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिये भी यह प्रावधान समान था लेकिन 7वें वेतन केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को अमल में लाने के बाद सरकारी कर्मचारियों के लिये एक जनवरी 2016 से यह सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई।
सरकार ने निजी क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों के मामले में महंगाई और वेतन वृद्धि को देखते हुए उनके लिये भी ग्रैच्युटी की सीमा बढ़ाने का फैसला किया। सरकार का मानना है कि ग्रैच्युटी भुगतान कानून 1972 के तहत आने वाले निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिये भी ग्रैच्युटी सीमा में संशोधन किया जाना चाहिये। इसके अनुसार सरकार ने ग्रैच्युटी भुगतान कानून, 1972 में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की है जो 10 या उससे अधिक कर्मचारियों को नियुक्त करने वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होता है।