केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि नोटबंदी से कर वसूली में बढ़ोतरी के संकेत हैं और उम्मीद है कि ज्यादा कर वसूली होगी। जेटली ने यहां बृहस्पतिवार को एसोचैम के 96वें वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि नोटबंदी के बाद कर वसूली के जो आंकड़े आए हैं, उसमें बढ़ोतरी के संकेत हैं। यही नहीं, इससे वर्ष के अंत में भी ज्यादा कर वसूली होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जहां काला धन का व्यापक असर है और यह दुनिया के ऐसे शीर्ष देशों की सूची में शामिल है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर जेटली ने कहा कि यह भारत के लिए चिंता की बात है। लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि शेल गैस की वजह से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लग सकता है। वित्त मंत्री ने कहा कि आधार को अब कानूनी स्वरूप मिलने से यह सब्सिडी को पात्र तक पहुंचाने में लांचिंग पैड का काम करेगा। इससे सब्सिडी का दुरुपयोग भी रुकेगा और सार्वजनिक कोष की भी बचत होगी।
यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई- योजना की चर्चा करते हुए जेटली ने कहा कि यूबीआई एक ऐसा विचार है, जिस पर आगे काम हो सकता है। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को ही एक राज्य के वित्त मंत्री ने उनसे मुलाकात के दौरान संकेत दिया कि वह अपने राज्य में इसे पायलट परियोजना के तौर पर लागू करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने विकसित देशों की संरक्षणवादी नीति का जिक्र करते हुए कहा कि वे अब संरक्षणवादी व्यापार की नीति पर अमल करने लगे हैं। इससे अपना कारोबार घट सकता है क्योंकि इसका असर भारतीय निर्यात भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विकसित देशों की इस तरह की नीतियों का असर अंतत: वैश्विकक सकल घरेलू उत्पाद को घटा देगा। वैश्विक सुस्ती का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह कोई अल्पावधि की समस्या नहीं है, यह लंबे समय तक चल सकती है। इसलिए इसी हिसाब से रणनीति बनाने की आवश्यकता है।