लाइफस्टाइल इंडस्ट्री में टाटा समूह की कंपनी टाइटन एक बड़ा और सफल नाम है। घड़ियों, जूलरी जैसे उत्पाद में कंपनी लीडरशिप पोजीशन में है। उसका लक्ष्य टाइटन टर्बो के अंदर आने वाले हर ब्रांड को नंबर-1 बनाना है।
टाइटन घरेलू बाजार में सफल मुकाम पर कैसे पहुंची...इस पर पेश है टाइटन कंपनी लि. के एमडी सीके वेंकटरमण से राहुल कांकरिया की विशेष बातचीत
टीम में नवाचार संस्कृति बढ़ानेे के लिए क्या करते हैं?
हमारे लिए राय महत्वपूर्ण है। जूनियर भी राय दे सकता है। काबिलियत मायने रखती है। लोगों का जुनून, उत्साह और संकल्प...सब मिलकर प्रभाव डालते हैं। इसे हम प्रोत्साहित करते हैं।
ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग के उदय का खुदरा उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ेगा और टाइटन इन परिवर्तनों को कैसे अपना रही है?
परिवर्तनों को एडॉप्ट करना या अपनाना सतत प्रक्रिया है। आजकल लोग कुछ भी खरीदने से पहले वेबसाइट पर विजिट करते हैं। फिर, चाहे 500 रुपये का टॉप लेना हो या पांच करोड़ की गाड़ी। हमने इन परिवर्तनों को बखूबी अपनाया है। वियरेबल्स कैटेगरी में देखें तो 60 फीसदी ऑनलाइन खरीदारी है। ऑनलाइन हैवी जूलरी में 100 फीसदी हो सकती है। ग्राहक ऑनलाइन जांच-परख के बाद ही तय करते हैं कि क्या खरीदना और क्या नहीं। शोरूम व मार्केट के बाद हम ऑनलाइन सफर के लिए तैयार हैं। मार्केटिंग की बात करें तो टाइटन ने उपभोक्ता वर्ग के आधार पर चीजों को अपनाया है। जहां युवा उपभोक्ताओं की संख्या ज्यादा है, वहां डिजिटल तरीके से मार्केटिंग करते हैं। वरिष्ठ नागरिकों तक अखबार या होर्डिंग्स के जरिये अपनी बात पहुंचाते हैं। इस तरह, हम इवॉल्व होते जा रहे हैं।
30 साल के कॅरिअर में महत्वपूर्ण सबक क्या सीखा?
रतन टाटा महत्वपूर्ण बात कहते थे कि अगर आपको तेज जाना है तो अकेले चलें, लेकिन दूर तक जाना है तो मिलकर चलें। इसे आप एकमात्र सबसे बड़ा सबक कहें या रणनीति, जिसे मैंने अपनाया।