करीब दो दशक बाद बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन के कोलकाता लौटने की संभावना फिर चर्चा में है। वह अगस्त में एक साहित्यिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए शहर आएंगी। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार उनके कोलकाता में निवास से जुड़े प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है। तसलीमा लंबे समय से भारत में रेजिडेंट परमिट पर रह रही हैं और कई बार कोलकाता को अपना दूसरा घर बता चुकी हैं।
बांग्लादेश से करीब तीन दशक से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन की फिर से अपने 'दूसरे घर' कोलकाता में रहने की इच्छा पूरी हो सकती है। अरसे से भारत में रेजिडेंट परमिट पर रह रहीं लेखिका के लिए प. बंगाल सरकार कोलकाता में रहने संबंधी प्रस्ताव भेजने पर विचार कर रही है। करीब 20 वर्ष बाद तसलीमा कोलकाता लौट रही हैं। वह एक अगस्त को रविंद्र सदन में कट्टरपंथ विरोधी कवि-लेखक सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। सीएम शुभेंदु अधिकारी को भी न्योता दिया गया है।
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तसलीमा को 2007 में बंगाल की बुद्धदेब सरकार ने मुस्लिम कट्टरपंथियों के हिंसक विरोध के बाद राज्य से निकाल दिया था। बांग्लादेश से निर्वासित होने के बाद 2004 में कोलकाता आईं तसलीमा को माकपा सरकार ने तो ठुकराया ही, 2011 में वाम मोर्चा का किला ढहाने वाली तृणमूल कांग्रेस की सरकार से भी उन्हें कोई 'ममता' नहीं मिली। इस बीच अमेरिका-यूरोप में लंबे प्रवास के बाद भारत लौटीं तसलीमा ने कई बार बांग्लादेश और बंगाल की एक सी संस्कृति का हवाला देते हुए कोलकाता को अपना दूसरा घर बताया।
दस साल से मिल रहा रेजिडेंट परमिट
तसलीमा बीते करीब दस वर्षों से राजधानी में रह रही हैं। इस दौरान उनके रेजिडेंट परमिट का कार्यकाल लगातार बढ़ाया गया है। गौरतलब है कि तसलीमा आतंकी संगठनों की धमकी के बीच 2015 में अमेरिका चली गई थीं। हालांकि वह 2017 से लगातार भारत में हैं।
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बिना बताए जयपुर जा रहे विमान में बैठाया
2007 में मुस्लिम कट्टरपंथियों के दबाव में बंगाल सरकार ने तस्लीमा को जानकारी दिए बिना उन्हें कोलकाता से जयपुर की फ्लाइट में बैठा दिया था। केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने भी मामले में दिलचस्पी नहीं ली। हालांकि तब गुजरात के सीएम व वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी ने तसलीमा को राज्य में रहने का न्योता दिया था। असहयोगपूर्ण माहौल में तसलीमा ने फिर यूरोप व अमेरिका को ठिकाना बनाया और 2011 में भारत लौटीं।
कट्टरपंथ के खिलाफ बड़ा संदेश
बंगाल सरकार के सूत्र के मुताबिक यदि तसलीमा मानीं तो उनका कोलकाता में रहने का इंतजाम किया जाएगा। कट्टरपंथ विरोधी लेखक-कवि सम्मेलन इस दिशा में पहली कड़ी है। इस कार्यक्रम के जरिये शुभेंदु सरकार मुस्लिम कट्टरपंथ को कड़ा संदेश देना चाहती है।