बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन का वीजा निरस्त कर उन्हें निर्वासित करने की गुहार संबंधी याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी यह याचिका खारिज कर दी थी। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता गैर सरकारी संगठन से कहा कि क्या आपको लगता है कि हमारे पास और कोई काम नहीं है?
संगठन का कहना था कि तसलीमा विदेशी अधिनियम, 1946 का उल्लंघन कर रही है। तसलीमा बिना किसी पूर्व अनुमति के हर मसले पर अपना नजरिया रखती हैं। याचिकाकर्ता संगठन के अध्यक्ष व वकील नफीस अहमद सिद्दीकी ने पीठ के समक्ष कहा कि तसलीमा को सन् 1994 में बांग्लादेश से निर्वासित किया गया था।
इसके बाद से वह भारत में रह रही हैं। वह अपना पेशेवर काम करने की बजाय विवादास्पद बयान देती रहती हैं। उन्होंने कहा कि वीजा की अवधि 180 दिनों से अधिक नहीं बढ़ाई जा सकती, लेकिन तसलीमा के लिए इस नियम की अनदेखी की जा रही है।