विदेशमंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को विदेश मामलों के लिए यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि जोसेप बोरेल फोंटेलस से मुलाकात की। दोनों अफगानिस्तान के हालात पर लगातार विचार-विमर्श करने पर राजी हुए। साथ ही दोनों ने यूरोपीय संघ और भारत के सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा की। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने 8 मई को हुए सम्मेलन के बाद भारत और ईयू के बीच सहयोग में हुई प्रगति पर भी चर्चा की।
जयशंकर ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। ईयू और भारतीय नेताओं की मई में वर्चुअल बैठक हुई थी। इसमें वैश्विक चुनौतियों, कोरोना महामारी से उत्पन्न दिक्कतों, पर्यावरण की समस्या, कारोबार और निवेश समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई थी। इसके अलावा जयशंकर ब्रिटेन के मंत्री लॉर्ड तारिक अहमद से भी मिले। इस दौरान दोनों ने द्विपक्षीय सहयोग पर बात की।
विदेशमंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शोवकत मिर्जियोयेव की संपर्क इतिहास में चरक, सुश्रुत, ब्रह्मगुप्त का उल्लेख करने के लिए सराहना की। उन्होंने ट्वीट किया कि मेरा स्वागत करने के लिए उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति मिर्जियोयेव का धन्यवाद। हमारे संपर्क इतिहास में चरक, सुश्रुत, ब्रह्मगुप्त का जिक्र करने के लिए उनकी सराहना करता हूं। भारत और उज्बेकिस्तान अंतर क्षेत्रीय संपर्क को आगे बढ़ा रहे हैं।
सुश्रुत लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व में थे। उन्होंने सुश्रुत संहिता लिखी जो चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में प्राचीन भारतीयों की उपलब्धियों को बताती है। वहीं चरक का चिकित्सा की आयुर्वेद प्रणाली में महत्वपूर्ण योगदान था और उन्होंने चरक संहिता लिखी। इसके अलावा ब्रह्मगुप्त ने गणित और खगोल विज्ञान पर महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे।