लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC), लेह के पूर्व मुख्य कार्यकारी पार्षद (सीईसी) ताशी ग्यालसन ने रविवार को लद्दाख को भारत का केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने पर चीन की आपत्ति की कड़ी निंदा की। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि चीन के कब्जे वाले इलाके का नाम 'अक्साई चीन' के बजाय बदलकर 'अक्साई हिंद' कर दिया जाए।
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कि बीजिंग लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता नहीं देता, ग्यालसन ने कहा कि लद्दाख हमेशा से भारत का एक अभिन्न और अटूट हिस्सा रहा है और इसे कभी भी देश से अलग नहीं किया जा सकता।
ग्यालसन ने क्या कहा?
ग्यालसन ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, 'हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। लद्दाख हमेशा से भारत का एक अभिन्न और अटूट हिस्सा रहा है, और लद्दाख को कभी भी भारत से अलग नहीं किया जा सकता। वे खुद दूसरे देश की जमीन पर कब्जा किए हुए हैं। आज वे लद्दाख पर भी बुरी नजर डालने की कोशिश कर रहे हैं। भारत सरकार पहले ही इसका जवाब दे चुकी है। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि उन्हें अपनी हद में रहना चाहिए।'
'अक्साई चिन नहीं अक्साई हिंद है'
ग्यालसन ने भारत सरकार से यह भी अपील की कि चीन के कब्ज़े वाले इलाके को 'अक्साई चिन' कहने के बजाय 'अक्साई हिंद' कहा जाए। उन्होंने कहा, 'मैं भारत सरकार से अनुरोध करना चाहता हूं कि हमें अब इसे 'अक्साई चिन' कहना बंद कर देना चाहिए। अब इसे 'अक्साई चिन' के नाम से नहीं जाना जाना चाहिए। यह विवादित इलाका हमारा वह इलाका जिस पर चीन ने कब्जा कर रखा है हमारा है; यह भारत का हिस्सा है। यह 'अक्साई चिन' नहीं है। अब इसे 'अक्साई हिंद' कहा जाना चाहिए।' ग्यालसन ने आगे कहा, 'चीनी लोग इस तरह के बेबुनियाद बयान देते रहते हैं। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।'
क्या है पूरा मामला?
यह बयान भारत और चीन के बीच चल रही राजनयिक बातचीत के बीच आया है। दरअसल, भारत ने हाल ही में लद्दाख में 28 भौगोलिक स्थानों और विशेषताओं के नामों को आधिकारिक नक्शों में एक समान (मानकीकृत) करने का फैसला लिया था, जिस पर बीजिंग ने आपत्ति जताई है।
चीन ने क्या कहा?
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि बीजिंग ने कभी भी 'केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख' को मान्यता नहीं दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने इसे एकतरफा और अवैध तरीके से बनाया है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
चीन के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत का रुख दोहराया कि लद्दाख देश का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि बीजिंग की आपत्तियों से यह सच्चाई नहीं बदल सकती।
एमईए के अनुसार, स्थानों की सटीक पहचान आसान बनाने और लोगों की जागरूकता बढ़ाने के लिए, इन मानकीकृत नामों को 'सर्वे ऑफ इंडिया' के आधिकारिक नक्शों में शामिल किया गया है।
इन अद्यतन नामों को औपचारिक रूप से 2 अक्तूबर को अपनाया गया। इनमें 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (एलओसी) के पास के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं, जैसे कि गोगरा और हॉट स्प्रिंग। ये वे जगहें थीं, जहां पैंगोंग झील के पास हुई झड़पों के बाद, 2020 में भारत और चीन के बीच सैन्य गतिरोध के दौरान सबसे ज्यादा तनाव रहा था।