सर्वोच्च न्यायालय ने जजों की आलोचना और टिप्पणी करने वालों को संदेश देते हुए सख्ती दिखाई है और कहा है कि जजो की आलोचना करना नया ट्रेंड बन गया है। अदालत ने कहा कि इस प्रवृति को रोकने के लिए हमें कठोर कदम उठाने होंगे। सर्वोच्च अदालत की एक पीठ ने इस संबंध में अवमानना के दोषी वकील को सजा के तौर पर केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए सहायता राशि दान करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि बेवजह जजों को टारगेट करना और उन्हें बदनाम करने के चलन पर रोक लगनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि बेबुनियाद धारणा बनाने से कभी-कभी जजों के लिए आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। एक एनजीओ के पदाधिकारी द्वारा चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर बेबुनियाद आरोप लगाने पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कड़ी आपत्ति जताई।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि अदालत की गरिमा बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा, इन दिनों जजों पर आधारहीन व बेवजह आरोप लगाना या जजों को टारगेट करना ट्रेंड बनता जा रहा है। इस पर लगाम जरूरी है।’
जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह कहा कि आधारहीन या बेबुनियाद आरोप लगाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। अगर कोई इस तरह का आधारहीन आरोप लगाता तो उसे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह संदेश लोगों तक पहुंचना जरूरी है।
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भारतीय मतदाता संगठन के महासचिव और वकील विमल वाधवन के खिलाफ लिखित में प्रमाण दिए। इसके आधार पर कोर्ट ने वाधवन को अवमानना का दोषी माना। बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि यह काफी अपमानजनक है। यह बुरा परिणाम वाला होगा। जब अवमानना के आरोपी वकील ने कोर्ट से नरमदिली की अपील की और हाथ जोड़कर माफी मांगी तो बेंच ने पूछा, 'आपने केरल बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए क्या किया है?'
बेंच ने अवमानना के दोषी पाए वकील के खिलाफ जवाबदेही तय करने के क्रम में वरिष्ठ वकील शेखर नापहाड़े ने कहा कि इन दिनों जजों की आलोचना का ट्रेंड बन गया है। उन्होंने कहा, 'ऑन रेकॉर्ड में सुप्रीम कोर्ट के वकील कई बार कुछ ऐसी टिप्पणी कर देते हैं, जिनके बारे में उन्हें भी नहीं पता होता है कि यह अवमानना के दायरे में है।'