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जजों पर बेबुनियाद आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, वकील को दिया बाढ़ पीड़ितों के लिए दान का आदेश

Tue, 21 Aug 2018 11:16 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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supreme court
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सर्वोच्च न्यायालय ने जजों की आलोचना और टिप्पणी करने वालों को संदेश देते हुए सख्ती दिखाई है और कहा है कि जजो की आलोचना करना नया ट्रेंड बन गया है। अदालत ने कहा कि इस प्रवृति को रोकने के लिए हमें कठोर कदम उठाने होंगे। सर्वोच्च अदालत की एक पीठ ने इस संबंध में अवमानना के दोषी वकील को सजा के तौर पर केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए सहायता राशि दान करने का निर्देश दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि बेवजह जजों को टारगेट करना और उन्हें बदनाम करने के चलन पर रोक लगनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि बेबुनियाद धारणा बनाने से कभी-कभी जजों के लिए आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। एक एनजीओ के पदाधिकारी द्वारा चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर बेबुनियाद आरोप लगाने पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कड़ी आपत्ति जताई।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि अदालत की गरिमा बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा, इन दिनों जजों पर आधारहीन व बेवजह आरोप लगाना या जजों को टारगेट करना ट्रेंड बनता जा रहा है। इस पर लगाम जरूरी है।’  
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जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह कहा कि आधारहीन या बेबुनियाद आरोप लगाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। अगर कोई इस तरह का आधारहीन आरोप लगाता तो उसे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह संदेश लोगों तक पहुंचना जरूरी है।  

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भारतीय मतदाता संगठन के महासचिव और वकील विमल वाधवन के खिलाफ लिखित में प्रमाण दिए। इसके आधार पर कोर्ट ने वाधवन को अवमानना का दोषी माना। बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि यह काफी अपमानजनक है। यह बुरा परिणाम वाला होगा। जब अवमानना के आरोपी वकील ने कोर्ट से नरमदिली की अपील की और हाथ जोड़कर माफी मांगी तो बेंच ने पूछा, 'आपने केरल बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए क्या किया है?' 

बेंच ने अवमानना के दोषी पाए वकील के खिलाफ जवाबदेही तय करने के क्रम में वरिष्ठ वकील शेखर नापहाड़े ने कहा कि इन दिनों जजों की आलोचना का ट्रेंड बन गया है। उन्होंने कहा, 'ऑन रेकॉर्ड में सुप्रीम कोर्ट के वकील कई बार कुछ ऐसी टिप्पणी कर देते हैं, जिनके बारे में उन्हें भी नहीं पता होता है कि यह अवमानना के दायरे में है।' 

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दीपक मिश्रा
 अवमानना में जुर्माने की रकम क्या हो 
अवमानना के दोषी वकील ने जब कोर्ट से रहम की गुहार लगाई तो बेंच ने कहा, 'अटॉर्नी जनरल ने केरल बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए 1 करोड़ की राशि दान की है। आपने अब तक क्या किया?' तब वाधवन ने कहा कि वह 50 हजार की रकम दान करना चाहते हैं, लेकिन एजी ने इसे 5 लाख करने की मांग की। जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कहा, 'अवमानना का दोषी करार करते हुए हमें खुशी नहीं मिलती, लेकिन इन दिनों जजों की आलोचना का यह एक ट्रेंड बन गया है। हम इस प्रवृति को बढ़ावा नहीं दे सकते हैं।' वाधवान ने सुनवाई से पहले ही बिना किसी शर्त के माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें अपनी गलती का अहसास है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी। 

क्या है मामला
पीठ ने ये टिप्पणी उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें सांसद या विधायकों को वकालत करने पर रोक लगाने की गुहार की गई है। इस मामले में गत नौ जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अभी इस पर फैसला आना बाकी है।  

चीफ जस्टिस पर लगाया आरोप
सोमवार को भारतीय मतदाता संगठन नामक एनजीओ के महासचिव विमल वाधवन ने लिखित रूप से पक्ष रखते हुए यह सवाल उठाया था कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को इस मामले से अलग रखना चाहिए क्योंकि बीजू जनता दल सांसद पिनाकी मिश्रा उनके रिश्तेदार हैं और वह वकालत भी करते हैं।

चूंकि यह मामला वकालत करने वाले सांसद या विधायक से जुड़ा है, ऐसे में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को इस सुनवाई का हिस्सा नहीं होना चाहिए। साथ ही एक सांसद होने केनाते पिनाकी मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के जज के खिलाफ होने वाले महाभियोग पर वोट देने का अधिकार है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में बतौर वकील पिनाकी मिश्रा को वकालत करने की अनुमति देना हितों का टकराव है। ऐसी स्थिति में पिनाकी मिश्रा के हक में भी फैसले आने की आशंका है।  

इस पर अदालत में मौजूद अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ से वाधवन केखिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की।  उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर न्यायालय की अवमानना है। हालांकि बाद में वाधवन ने हाथ जोड़ पर पीठ से अपनी गलती के लिए माफी मांगी। जिस पर पीठ ने वाधवन को हलफनामे के जरिए माफीनामा दाखिल करने के लिए कहा है। 
 
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