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स्मृति शेष: मजहबी कट्टरवाद के खिलाफ हमेशा मुखर रहे तारिक फतेह, खुद को बताते थे हिंदुस्तान का बेटा

Tue, 25 Apr 2023 05:31 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कट्टरपंथी भारतीय और पाकिस्तानी मुसलमानों की अलगाववादी संस्कृति और मजहबी कट्टरवाद के खिलाफ हमेशा मुखर रहने वाली एक आवाज हमेशा के लिए मौन हो गई। सही मायने में धर्मनिरपेक्ष उदारवादी कार्यकर्ता रहे तारिक फतेह लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे।
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तारिक फतेह - फोटो : File Photo
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विस्तार
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तारिक फतेह का परिवार मूलरूप से मुंबई का रहने वाला था, जो 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान के कराची शहर में जाकर बस गया था। तारिक फतेह का जन्म 20 नवंबर, 1949 को हुआ। भले ही उनका जन्म पाकिस्तान में हुआ था और बाद में वह कनाडा में बस गए थे, लेकिन वह हमेशा खुद को हिंदुस्तान का बेटा बताते थे।
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तारिक फतेह ने कराची विश्वविद्यालय से बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई की। उसके बाद एक पाकिस्तानी टीवी चैनल के लिए पत्रकारिता शुरू की। 1970 में वह कराची सन नाम के अखबार में रिपोर्टिंग करते थे। खोजी पत्रकारिता के कारण वे कई बार जेल भी गए। अपने शुरुआती जीवन में वे वामपंथी विचारधारा से भी प्रेरित रहे। पाकिस्तान को लेकर उनमें शुरू से ही रोष देखने को मिला। इसका खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ा। 1977 में उन पर गद्दारी का आरोप लगा और अखबार में उनका लिखना भी बंद हो गया।

पाकिस्तान को हमेशा दिखाया आईना
तारिक फतेह हमेशा से पाकिस्तान के कट्टर आलोचक रहे। उन्होंने कई मौकों पर पाकिस्तान को आईना दिखाने का काम किया। भारत और हिंदुओं के प्रति उनका रुख हमेशा से सकारात्मक रहा। हर बड़े मुद्दे पर वह अपना विचार रखते थे। इस्लाम की कुछ परंपराओं को लेकर उनके विचार विवादों में भी रहे।
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मोदी सरकार की तारीफ की
कई मुद्दों पर उन्होंने भारत का समर्थन किया। उन्होंने कई बार मोदी सरकार की सराहना की थी। एक बयान में उन्होंने कहा था कि मोदी ने बिना एक गोली चलाए पाकिस्तान को भुखमरी की हालत पर ला दिया।

पहले सऊदी फिर कनाडा गए
तारिक फतेह 1980 के दशक में पाकिस्तान से पहले सऊदी अरब गए। उसके बाद 1987 में वह कनाडा चले गए और वहीं बस गए। हालांकि, बीच-बीच में उनका भारत आना होता रहता था। वह भारत के विभाजन को गलत बताते थे। उनका कहना था कि पाकिस्तान भी भारतीय संस्कृति का हिस्सा है।

भारतीय संस्कृति को एकता का सूत्र बताते थे
तारिक फतेह हमेशा मजहबी कट्टरता के खिलाफ रहे। वह भारतीय संस्कृति को एकता का सूत्र मानते थे। उन पर पाकिस्तानी आतंकियों ने कई बार हमला किया, लेकिन वह डरे नहीं, बल्कि और बेबाकी से अपनी राय रखते रहे। वह भारत में अक्सर टीवी चैनलों पर होने वाली बहसों में दिखाई देते थे।

कई किताबें भी लिखीं
तारिक फतेह ने कई किताबें लिखी थीं जिनमें से ‘ चेजिंग अ मिराज : द ट्रैजिक इल्लुजन ऑफ एन इस्लामिक स्टेट’ बहुत प्रसिद्ध रही। वे समलैंगिक लोगों के सामान अधिकारों और हितों के पक्षधर थे।

आरएसएस ने निधन पर शोक जताया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने तारिक फतेह के निधन पर शोक जताया है। ट्विटर पर पोस्ट शोक संदेश में आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने लिखा, फतेह एक प्रसिद्ध विचारक, लेखक और टीकाकार थे। मीडिया और साहित्य जगत में उनके महत्वपूर्ण योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। मैं उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता हूं और दिवंगत आत्मा की सद्गति के लिए प्रार्थना करता हूं।
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