चेन्नई पुलिस ने TVK सरकार को गिराने की कथित साजिश और विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में DMK के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई आर. वी. अशोक कुमार के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। पुलिस का दावा है कि दोनों के निर्देश पर विधायकों को करोड़ों रुपये का लालच देकर सरकार गिराने की कोशिश की गई, जबकि DMK ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है।
चेन्नई पुलिस ने तमिलनाडु में हाल ही में बनी सी विजय जोसेफ की तमिलगा वेत्री कड़गम सरकार को गिराने की कथित साजिश की जांच तेज करते हुए शनिवार को DMK के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई आर. वी. अशोक कुमार के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया। यह कार्रवाई विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) से जुड़े एक बड़े राजनीतिक मामले के बीच हुई है। आरोप है कि TVK के एक विधायक को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ मतदान करने के लिए 35 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी।
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पूछताछ के लिए पूर्व मंत्री को कब बुलाया गया?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, करूर जिले के रामेश्वरपट्टी स्थित सेंथिल बालाजी के पैतृक आवास पर समन भेजा गया है। इसमें सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को 6 जुलाई को पूछताछ के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। दोनों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी कर दिया गया है।
कब सामने आया था मामला?
यह मामला 29 जून को उथंगराई से टीवीके विधायक एन. इलैयाराजा की शिकायत के बाद सामने आया। विधायक का आरोप है कि एक व्यक्ति ने खुद को एक ओपिनियन पोलिंग फर्म का प्रमुख बताते हुए उनसे संपर्क किया और दावा किया कि वह एक 'बड़ी राजनीतिक पार्टी' की ओर से बात कर रहा है। उसने कथित तौर पर करोड़ों रुपये की रिश्वत देकर सरकार के खिलाफ मतदान करने का प्रस्ताव दिया। विधायक के इनकार करने पर उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।
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किसके कहने पर काम कर रहे थे आरोपी?
अब तक पुलिस इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें कथित मुख्य बिचौलिया थिरुनावुक्करसु और उसके सहयोगी नरेश तथा त्यागराजन शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार के सीधे निर्देश पर काम कर रहे थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल के विधायकों को अपने पक्ष में करने और मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की सरकार को अस्थिर करने के लिए करीब 180 करोड़ रुपये की कथित योजना बनाई गई थी। फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की विशेष टीमें करूर, तिरुचिरापल्ली, कोयंबटूर और बेंगलुरु में लगातार छापेमारी कर रही हैं।
अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट पहुंचे अशोक कुमार
गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अशोक कुमार ने इस सप्ताह की शुरुआत में मद्रास हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। उनका कहना है कि उन्हें केवल आरोपियों के बयानों के आधार पर झूठा फंसाया जा रहा है। कथित साजिश से उन्हें जोड़ने वाला कोई स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य जांच एजेंसियों के पास नहीं है। इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। TVK के मंत्रियों ने आरोप लगाया है कि DMK नेतृत्व उनकी सरकार को अस्थिर करने और विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। वहीं DMK ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित और बिना सबूत का मामला बताया है।
DMK ने राज्यपाल को लिखा पत्र
सरकार की कार्रवाई के जवाब में DMK के वरिष्ठ नेता आर.एस. भारती ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर और डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (DVAC) को लिखित शिकायतें सौंपी हैं। DMK ने मुख्यमंत्री विजय पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए MDMK के दो विधायकों को दोबारा चुनाव में समर्थन का आश्वासन देकर इस्तीफा देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही पार्टी ने TVK की कथित खरीद-फरोख्त की गतिविधियों की निष्पक्ष और व्यापक जांच की भी मांग की है।