तमिलनाडु में रामेश्वरम के मछुआरों पर श्रीलंकाई नौसेना के कर्मियों ने धनुषकोडी के पास मछली पकड़ने के दौरान कथित रूप से बोतलों और पत्थरों से हमला कर दिया। इस कथित हमले में कुछ मछुआरे घायल हो गए। श्रीलंकाई नौसेना ने मछुआरों के उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाया है।
मछुआरों के स्थानीय संघ के प्रमुख सेसुराजा ने पत्रकारों को बताया कि मछुआरे सोमवार सुबह 400 नौकाओं पर सवार हो कर मछली पकड़ने गए थे और रात में वापस लौटने के दौरान श्रीलंका की नौसेना के कर्मियों ने उन्हें खदेड़ा और हमला कर दिया।
राजनीतिक दलों ने हमले की निंदा की
एमडीएमके समेत राजनीतिक पार्टियों ने भारतीय जल क्षेत्र के धनुषकोडी में 'हमले' की निंदा की है। यह हमला 17 अक्तूबर को श्रीलंकाई नौसेना द्वारा चार हजार से ज्यादा मछुआरों को खदेड़ने के बाद हुआ है। वे कच्चातीवु के पास मछली पकड़ रहे थे।
सेसुराजा ने बताया कि तीन महीने से ज्यादा समय के दौरान समंदर में मछुआरों पर कोई हमला नहीं किया गया था।मत्स्य पालन विभाग में सहायक निदेशक राजेंद्रन और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वे मछुआरों पर कथित हमलों की शिकायतों को देख रहे हैं। सेसुराजा ने आरोप लगाया कि श्रीलंका की नौसेना ने मछुआरों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी, जिसमें एक मछुआरा गंभीर रूप से जख्मी हुआ है। जबकि अन्य को चोटें आई हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके मछली पकड़ने के जाल और अन्य सामान को भी कर्मियों ने नुकसान पहुंचाया है।
एमडीएमके के महासचिव और राज्यसभा सदस्य वाइको ने आरोप लगाया कि एक मछुआरे के सिर पर चोट लगी है जबकि अन्य कई को जख्म हुए हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने श्रीलंका के समक्ष कड़ा विरोध तक दर्ज नहीं कराया है और यह पीड़ादायक है।पीएमके संस्थापक एस रामदोस ने भी हमले की निंदा की।
बता दें कि यह पहली बार नहीं है, जब श्रीलंकाई नौसेना ने भारतीय मछुआरों पर कांच की बोतलों और पत्थरों से हमला किया है। इससे पहले भी इसी क्षेत्र में कई बार इस तरह की घटनाएं देखने को मिली हैं।