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तमिलनाडु में शराब की दुकानों पर ₹20 तक वसूली: 60 से ज्यादा कर्मचारी निलंबित,आखिर क्यों बढ़ा विवाद?

Wed, 02 Sep 2026 10:29 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई।

सार

तमिलनाडु में टीएएसएमएसी दुकानों पर ग्राहकों से शराब की बोतल के तय दाम से ज्यादा पैसे लेने के आरोप में 60 से अधिक कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। सरकार के मुताबिक, कई जगहों पर ₹10 या ₹20 अतिरिक्त वसूले जाने की शिकायतें मिली थीं। विधानसभा में सरकार ने इस पुराने चलन के लिए पिछली डीएमके सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया, जबकि डीएमके ने मौजूदा सरकार से ही सवाल पूछे। विवाद इतना बढ़ा कि डीएमके सदस्यों ने विधानसभा से वॉकआउट कर दिया।
 
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शराब की दुकानें - फोटो : फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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तमिलनाडु में सरकारी शराब दुकानों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन की दुकानों पर ग्राहकों से शराब की बोतल के तय दाम से ज्यादा पैसे लेने के आरोप में 60 से ज्यादा कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। एक ही दिन में हुई इस कार्रवाई से मामला चर्चा में आ गया है।
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सरकार के सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई चेन्नई, मदुरै, सेलम, त्रिची और कोयंबटूर समेत कई बड़े शहरों में की गई है। आरोप है कि टीएएसएमएसी दुकानों पर ग्राहकों से शराब की बोतल के लिए तय कीमत से ₹10 या ₹20 अतिरिक्त लिए जा रहे थे।

टीएएसएमएसी क्या है और विवाद किस बात पर है?
टीएएसएमएसी तमिलनाडु सरकार की शराब की खुदरा बिक्री व्यवस्था है। राज्य में शराब की बिक्री के लिए बड़ी संख्या में टीएएसएमएसी दुकानें संचालित होती हैं। विवाद इस बात को लेकर है कि ग्राहकों से बोतल पर छपी कीमत से ज्यादा रकम क्यों ली जा रही है। टीवीके सरकार ने साफ कहा है कि यह अतिरिक्त ₹10 कोई सरकारी शुल्क नहीं है। यानी ग्राहक से तय कीमत से ऊपर ली जाने वाली रकम आधिकारिक तौर पर सरकार की ओर से तय नहीं की गई है।
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दुकानों पर ₹10-20 अतिरिक्त क्यों लिए जा रहे थे?
विधानसभा में इस मुद्दे पर जवाब देते हुए निषेध एवं आबकारी मंत्री के. विग्नेश ने इस व्यवस्था की पुरानी कहानी बताई। उनके मुताबिक, जब टीएएसएमएसी दुकानों के कर्मचारियों को काफी कम वेतन मिलता था, तब बोतल पर ₹2 अतिरिक्त लेने की शुरुआत हुई थी।

समय के साथ यह रकम बढ़ती गई। मंत्री के मुताबिक, ₹2 से यह राशि ₹5 और फिर ₹10-20 तक पहुंच गई। उनका कहना था कि इस पैसे का इस्तेमाल दुकानों के बिजली बिल, किराए और रखरखाव जैसे बुनियादी खर्चों में किया जाता था। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया कि इस तरह अतिरिक्त पैसे लेना सही नहीं है। इसी वजह से अब ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है।

सरकार ने पिछली डीएमके सरकार को क्यों घेरा?
मंत्री के. विग्नेश ने विधानसभा में इस व्यवस्था के लिए पिछली डीएमके सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान टीएएसएमएसी कर्मचारियों के वेतन में पर्याप्त सुधार नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दुकानों के नियमित रखरखाव के लिए पर्याप्त सरकारी फंड उपलब्ध नहीं कराया गया। सरकार का तर्क है कि इन परिस्थितियों के कारण अतिरिक्त पैसे लेने की व्यवस्था धीरे-धीरे टीएएसएमएसी दुकानों में जड़ पकड़ती गई। मंत्री ने कहा कि मौजूदा टीवीके सरकार, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व में, कर्मचारियों का वेतन बढ़ा रही है और दुकानों से भ्रष्टाचार खत्म करने की कोशिश कर रही है।

टीएएसएमएसी कर्मचारियों की सैलरी कितनी थी?
विधानसभा में मंत्री ने टीएएसएमएसी कर्मचारियों की पुरानी वेतन व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले कर्मचारियों को करीब ₹14,000 का सकल मासिक वेतन मिलता था। कटौती के बाद कर्मचारियों के हाथ में करीब ₹11,000 आते थे। सरकार का कहना है कि कर्मचारियों की वेतन और कामकाज से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद अगर किसी कर्मचारी ने ग्राहक से तय कीमत से अधिक रकम ली, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

डीएमके ने सरकार से क्या सवाल पूछा?
पूर्व डीएमके मंत्री के. एन. नेहरू ने सरकार के तर्क पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि अगर अतिरिक्त ₹10 लेना भ्रष्टाचार है, तो इसे अब भी जारी रहने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। नेहरू ने सरकार के सामने मूल सवाल रखा कि अगर यह व्यवस्था पिछली सरकार के समय गलत थी, तो मौजूदा सरकार के समय भी इसे सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार खुद मान रही है कि ग्राहकों से वर्षों से अतिरिक्त रकम ली जा रही है। ऐसे में इसके लिए केवल पिछली सरकार को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है।

सरकार ने भ्रष्टाचार पर क्या कहा?
बहस के दौरान कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार भी शामिल हुए। उन्होंने विपक्ष पर सरकार की ओर से की जा रही भ्रष्टाचार की जांच को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने टेंडर से जुड़ी कथित अनियमितताओं और कुछ ऐसे मामलों का जिक्र किया, जिनमें कथित तौर पर लोगों ने व्यवस्था में हेरफेर कर कई शराब की खुदरा दुकानें चलाने की कोशिश की थी। हालांकि इस दौरान बहस टीएएसएमएसी से आगे बढ़कर पिछली सरकार के कार्यकाल में कथित भ्रष्टाचार के दूसरे मामलों तक पहुंच गई।

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सरकार टीएएसएमएसी में कौन से बदलाव करना चाहती है?
मंत्री के. विग्नेश ने माना कि टीएएसएमएसी में सुधार करना आसान नहीं है। उनका कहना था कि पिछले करीब दो दशकों में कई व्यवस्थाएं इतनी पुरानी हो चुकी हैं कि उन्हें बदलने में समय लगेगा। सरकार ने टीएएसएमएसी में व्यापक सुधार का दावा किया है। इसमें कर्मचारियों को बेहतर वेतन देना, दुकानों के संचालन के लिए आधिकारिक फंड उपलब्ध कराना और शराब प्रशासन की व्यवस्था में बदलाव शामिल है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का मकसद दुकानों पर चल रही अनौपचारिक वसूली को खत्म करना है।

विधानसभा में विवाद अचानक क्यों बढ़ गया?
टीएएसएमएसी पर शुरू हुई बहस उस समय और गर्म हो गई, जब लोक निर्माण एवं खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन ने पिछली डीएमके सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने भ्रष्टाचार के अलग-अलग रूपों का जिक्र किया और खनन तथा रेत से जुड़े मामलों के साथ फिल्म उद्योग और टीएएसएमएसी शराब से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उनकी टिप्पणी पर डीएमके सदस्य विरोध में खड़े हो गए। इसके बाद अर्जुन ने सफाई दी कि उन्होंने किसी खास व्यक्ति का नाम नहीं लिया था।
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डीएमके ने विधानसभा से वॉकआउट क्यों किया?
मामला बढ़ने के बाद डीएमके सदस्यों ने विधानसभा से वॉकआउट कर दिया। बाद में पूर्व मंत्री के. एन. नेहरू और वी. सेंथिल बालाजी ने विधानसभा के बाहर सरकार पर निशाना साधा। दोनों नेताओं ने कहा कि डीएमके सदस्यों ने सरकार की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देने और अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए स्पीकर से अनुमति मांगी थी। उनके मुताबिक, अनुमति नहीं मिलने के बाद विपक्षी सदस्यों ने विधानसभा से बाहर निकलने का फैसला किया।
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