प्रोफेसर राजन और पुरातत्व विभाग के संयुक्त निदेशक शिवानंदन ने 140 पुरातात्विक स्थलों से मिले 15,000 से अधिक भित्तिचित्र वाले बर्तनों का गहन अध्ययन किया। इनको डिजिटाइज कर सिंधु घाटी सभ्यता के संकेतों से इनकी तुलना की गई।
तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग के एक हालिया अध्ययन में दावा किया गया है कि तमिलनाडु में प्राचीन पुरातात्विक स्थलों पर खुदाई के दौरान मिले लगभग 90 फीसदी भित्तिचित्रों के निशान सिंधु घाटी सभ्यता के चिह्नों से मिलते जुलते हैं। तमिलनाडु पुरातत्व विभाग के संयुक्त निदेशक आर शिवनाथन और प्रोफेसर के राजन के अध्ययनों का यह निष्कर्ष सिंधु घाटी सभ्यता की खोज की शताब्दी के अवसर पर जारी किया गया।
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प्रोफेसर राजन और पुरातत्व विभाग के संयुक्त निदेशक शिवानंदन ने 140 पुरातात्विक स्थलों से मिले 15,000 से अधिक भित्तिचित्र वाले बर्तनों का गहन अध्ययन किया। इनको डिजिटाइज कर सिंधु घाटी सभ्यता के संकेतों से इनकी तुलना की गई। तुलनात्मक अध्ययन से पता चला कि सिंधु घाटी सभ्यता और लौह युग की बस्तियों के बीच कई समानताएं पाई गईं।
इससे यह संभावना जताई गई कि सिंधु घाटी सभ्यता और तमिलनाडु की लौह युगीन बस्तियों के बीच संपर्क हो सकता है। हालांकि, इस संबंध को पुख्ता करने के लिए और सबूतों की जरूरत है, और इस पर आगे शोध किया जा रहा है। पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान भित्तिचित्रों के अलावा, कार्नेलियन मोती, अकीक, काले-लाल बर्तन और अन्य वस्तुएं मिलीं। पुरातत्व स्थल पर 120 दबे कलशों में से एक में मिला धान का भूसा कार्बन डेटिंग के बाद 3,200 साल पुराना साबित हुआ।