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क्या स्टालिन की वजह से थलापति को मिली 'विजय': किसने लिखी पूरी स्क्रिप्ट, पक्ष-विपक्ष का ये कैसा गठजोड़?

Sat, 09 May 2026 06:57 PM IST
कुमार विवेक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तमिलनाडु में डीएमके के सहयोगी दलों (वीसीके, वाम पार्टियां और आईयूएमएल) ने टीवीके सरकार को समर्थन दिया है, हालांकि उन्होंने डीएमके के साथ भी नजदीकी बने रहने के संकेत दिए हैं।। जानिए क्या एमके स्टालिन नई सरकार में अपरोक्ष भूमिका निभा रहे हैं। 
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तमिलनाडु के निवर्तमान सीएम स्टालिन और विजय। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति एक अभूतपूर्व मोड़ पर खड़ी है। चुनाव हारकर सत्ता से बाहर होने वाली द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) के प्रमुख सहयोगी दलों ने अब अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का एलान कर दिया है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि टीवीके को समर्थन देने के बावजूद इन दलों ने डीएमके के साथ अपने वैचारिक और गठबंधन संबंधों को मजबूती से बरकरार रखने की घोषणा की है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या तमिलनाडु में बन रही नई सरकार में डीएमके अपने सहयोगियों के माध्यम से एक अपरोक्ष भूमिका निभा रही है? 

राष्ट्रपति शासन टालने की रणनीति और वैचारिक निष्ठा

राज्य में उत्पन्न हुई राजनीतिक अस्थिरता के कारण राष्ट्रपति शासन लागू होने का खतरा मंडरा रहा था, जिसे टालने के लिए डीएमके के सहयोगियों ने एक दूरदर्शी रणनीति अपनाई है। विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) के प्रमुख थोल तिरुमावलवन ने साफ किया है कि उनकी पार्टी ने वामपंथी दलों (सीपीआई और सीपीएम) के साथ विचार-विमर्श करने के बाद भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए टीवीके को बिना शर्त समर्थन देने का संयुक्त फैसला किया है। तिरुमावलवन ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति शासन को रोकने के लिए टीवीके का समर्थन करना उनकी पार्टी का एक स्वतंत्र निर्णय है, लेकिन इसका डीएमके के साथ उनके गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वे पहले की तरह ही गठबंधन का हिस्सा बने रहेंगे। 

पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन का खुला स्वागत और कांग्रेस से दूरी

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की प्रतिक्रिया ने इस अपरोक्ष समर्थन के सिद्धांत को और बल दिया है। स्टालिन ने अपने सहयोगी दलों के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि वर्तमान संकट से बचने के लिए टीवीके को समर्थन देने के बावजूद सहयोगी दल नीतिगत आधार पर डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन में बने हुए हैं। स्टालिन ने इस वैचारिक दृढ़ता और विश्वास के लिए वामपंथी नेताओं, वीसीके और अन्य सहयोगियों का दिल से आभार व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि गठबंधन की ओर से चुनाव जीतने वाले कांग्रेस विधायकों ने धन्यवाद तक नहीं दिया और उसी दिन डीएमके से नाता तोड़ लिया। इसके साथ ही स्टालिन ने नई सरकार से यह अपेक्षा भी जताई है कि वह उनकी पूर्ववर्ती सरकार की दूरदर्शी और समृद्ध योजनाओं को आगे भी जारी रखेगी।

जनादेश का सम्मान और आईयूएमएल का रुख

डीएमके गठबंधन के एक अन्य महत्वपूर्ण घटक इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने भी टीवीके को समर्थन देने के इस फैसले को समय की मांग बताया है। आईयूएमएल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के.एम. कादर मोहिदीन ने कहा कि उन्हें हालिया चुनावों में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन के बहुमत हासिल करने की उम्मीद थी, लेकिन मतदाताओं ने 108 सीटों के साथ विजय की पार्टी को चुना है। मोहिदीन के अनुसार, राज्य में सरकार का गठन एक तत्कालीन आवश्यकता है और नई पार्टी को समर्थन देने से पहले इस पूरी स्थिति से एमके स्टालिन को अवगत करा दिया गया था। आईयूएमएल प्रमुख ने नई सरकार को शुभकामनाएं देते हुए राज्य की जनता के हित में काम करने की उम्मीद जताई है।

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तमिलनाडु का यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में गठबंधन के एक नए स्वरूप को जन्म दे रहा है। जहां एक ओर डीएमके के सहयोगी दल वैचारिक रूप से एमके स्टालिन के साथ खड़े हैं, वहीं वे राज्य को संवैधानिक संकट से बचाने के लिए नई सत्तारूढ़ पार्टी का भी बचाव कर रहे हैं। स्टालिन का अपने सहयोगियों के प्रति आभार और पूर्ववर्ती योजनाओं को जारी रखने की अपील इस बात का स्पष्ट संकेत है कि टीवीके सरकार के नीतिगत फैसलों और स्थिरता में डीएमके गठबंधन का यह रुख एक अप्रत्यक्ष लेकिन बेहद अहम भूमिका निभाएगा।
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