कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मंगलवार को तमिलनाडु के गुडलूर पहुंचे। जहां उन्होंने थॉमस इंग्लिश हाई स्कूल में स्कूली बच्चों से मिले, बातचीत की और अपने स्कूल के दिनों को याद किया।इतना ही नहीं इस दौरान उन्होंने देश व्यापी मुद्दे एआई से लेकर आईटी तक के विषय में बातचीत की। हालांकि छात्रों से बातचीत के दौरान जब राहुल ने अपने स्कूल के दिनों को याद किया और अपनी शरारतों के बारे बताया तो इन बातों ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बंटोरी।
छात्रों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने मजेदार अंदाज में बताया कि वे अपने स्कूल के दिनों में काफी शरारती हुआ करते थे। हर दिन वे कुछ न कुछ शरारत करते थे। उन्होंने बताया कि जब वे बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते थे, तो वह अपने माता-पिता को यह यकीन दिलाते थे कि वह खुश नहीं हैं, ताकि उनके माता-पिता उनसे मिलने आएं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि वे सच में उदास नहीं रहते थे, बल्कि स्कूल में वह बहुत खुश रहते थे।
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रसायन विज्ञान की शिक्षिका थी पसंद- राहुल
इस दौरान राहुल गांधी ने अपनी पसंदीदा शिक्षिका के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि उनके स्कूल के दिनों में उन्हें रसायन विज्ञान की शिक्षिका बहुत पसंद थी। राहुल गांधी ने कहा कि उनकी रसायन विज्ञान की शिक्षका पढ़ाने में बहुत अच्छी थी और परीक्षा की तैयारी में मदद करती थी, इसीलिए उन्हें वह शिक्षिका बहुत अच्छी लगती थीं।
मेरे घर की दादी बॉस थीं- राहुल गांधी
इस दौरान एक छात्र के सवाल पर राहुल गांधी ने महिलाओं की भूमिका को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह ऐसे परिवार में बड़े हुए हैं, जहां उनकी दादी (पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी) ही परिवार की मुखिया थीं। राहुल गांधी के इस बयान को महिलाओं के सम्मान और नेतृत्व से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी दादी न सिर्फ परिवार संभालती थीं, बल्कि मुश्किल हालात में भी मजबूत फैसले लेती थीं। इसी माहौल में उन्हें महिलाओं की ताकत और नेतृत्व को समझने का मौका मिला।
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महिलाओं की भूमिका पर क्या बोले राहुल
उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं में नेतृत्व, समझ और साहस की कोई कमी नहीं होती। राहुल गांधी का मानना है कि अगर महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिले, तो वे परिवार, समाज और देश को बेहतर दिशा दे सकती हैं। इसके साथ ही राहुल गांधी ने यह भी संकेत दिया कि आज के समय में महिलाओं की भागीदारी राजनीति, शिक्षा, तकनीक और रोजगार जैसे क्षेत्रों में और बढ़ाई जानी चाहिए।
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